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“संघ की अच्छाई को विराेधी और कम्युनिस्ट भी स्वीकार करते हैं” : माेहन भागवत

19 Mar 2026




नागपुर, 19 मार्च (हि.स.) । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने गुरुवार को नागपुर में कहा कि अब विरोधी और कम्युनिस्ट भी संघ की अच्छाई को स्वीकार करने लगे हैं।


सरसंघचालक डॉ. भागवत आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और डॉ. विलास डांगरे की मौजूदगी में स्थानीय सुरेश भट्ट सभागार में आयोजित एक साक्षात्कार कार्यक्रम में बाेल रहे थे।


सरसंघचालक ने कहा कि परस्पर प्रेम और आत्मीयता के कारण ही संघ और उसका कार्य बढ़ा है। जब तक दो व्यक्ति एक-दूसरे से मिलते रहेंगे, तब तक संघ समाप्त नहीं होगा। अब विरोधी और कम्युनिस्ट भी संघ की अच्छाई को स्वीकार करने लगे हैं। उन्हाेंने कहा कि अनुकूलता एक बड़ी चुनौती होती है और पतन की शुरुआत भी अनुकूलता से ही होती है। अभी तक संघ का स्वयंसेवक प्रसिद्धि के अनुरूप नहीं बना है और ऐसा न हो, इसके प्रयास भी किए जा रहे हैं। अनुकूल परिस्थितियों में कार्य कैसे किया जाए, यह विषय बौद्धिक वर्ग में चर्चा का विषय होता है। स्वयंसेवकों को अनुकूलता का दुष्प्रभाव न हो, इस पर विचार और प्रयास निरंतर जारी हैं।


संघ प्रमुख ने बताया कि पिछले 100 वर्षों में संघ का कार्य व्यापक हुआ है, इसलिए संरचना का विकेंद्रीकरण आवश्यक हो गया। कार्य के दौरान कई बार शासन-प्रशासन से संपर्क होता है, इसलिए अलग व्यवस्था की आवश्यकता महसूस हुई। इसी विचार से प्रांत के स्थान पर अब ‘विभाग’ की संरचना बनाई गई है। लोगों से मित्रता स्थापित करना और अपने उदाहरण से परिवर्तन लाना ही संघ की कार्यपद्धति है। समय के अनुसार स्वरूप बदलता है, परंतु कार्यपद्धति वही रहती है।


सरसंघचालक ने कहा कि संघ के प्रारंभिक काल में परिस्थितियां और चुनौतियां भिन्न थीं। विभाजन के समय हिंदुओं के विरुद्ध दंगे होते थे, इसलिए उस समय संघ का कार्य उनके संरक्षण पर केंद्रित था। अब समय और चुनौतियां बदल गई हैं, इसलिए कार्य भी परिवर्तित हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कई विरोधी और कम्युनिस्ट स्वयं को संघ का विरोधी बताते हैं, लेकिन साथ ही संघ को अच्छा भी कहते हैं।


उन्होंने कहा कि कई बार उनके वक्तव्यों का गलत अर्थ निकाला जाता है, लेकिन इससे उन्हें कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता। बल्कि उन्हें दया और हंसी आती है। अब संघ के विरोध में कहने के लिए लोगों के पास अधिक कुछ नहीं है, इसलिए वे कुछ भी कह देते हैं। ऐसी घटनाओं से सीख भी मिलती है कि लोग किसी कथन का क्या अर्थ निकाल सकते हैं।


संघ के कार्य के प्रति ‘जेन-ज़ी’ अनुकूल कहे जाने वाली पीढ़ी में देश को महान बनाने और परंपराओं को आगे बढ़ाने की भावना दिखाई देती है। उन्हें ईमानदारी और सेवा आकर्षित करती है, जिससे उनका जुड़ाव संघ के विचारों से हो रहा है। वे संघ के कार्य के प्रति अनुकूल हैं। यद्यपि परिस्थितियों के कारण वे प्रत्यक्ष शाखाओं में आने में कुछ कठिनाइयों का सामना करते हैं, फिर भी वे संघ से जुड़ना चाहते हैं। इसके लिए संघ द्वारा उपयुक्त व्यवस्थाएं की जा रही हैं। हाईराइज इमारतों और सोसायटियों में युवाओं से संपर्क बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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