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इंदौर में किसानों का उग्र आंदोलन, भोपाल कूच करते हुए पुलिस ने रोका, चलाए वाटर कैनन-छोड़े आंसू गैस

20 Jul 2026



- परियोजना में अधिग्रहित की जा रही जमीन के चार गुना मुआवजे की मांग


इंदौर, 20 जुलाई (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में पश्चिमी रिंग रोड परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन के चार गुना मुआवजे की मांग को लेकर सोमवार को भोपाल कूच कर रहे किसानों को पुलिस ने शिप्रा चौराहे पर रोक दिया। किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस द्वारा वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले छोड़े गए, जिससे 7 किसान घायल हो गए। इसके विरोध में किसान बरलाई जागीर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं।


दरअसल, इंदौर-देवास वेस्टर्न रिंग रोड के लिए अधिग्रहित की जा रही कृषि भूमि के उचित मुआवजे को लेकर करणी सेना परिवार और क्षेत्र के किसानों ने सोमवार को बड़े पैमाने पर ट्रैक्टर रैली निकालकर भोपाल कूच का आह्वान किया था। जैसे ही सैकड़ों किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ आगे बढ़े, पुलिस और प्रशासन ने उन्हें शिप्रा चौराहे पर डंपर और भारी बैरिकेडिंग लगाकर रोक लिया। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच तीखी बहस और तनाव की स्थिति पैदा हो गई। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने और आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस की ओर से वाटर कैनन से पानी की बौछारें की गईं और आंसू गैस के गोले दागे गए। इस अचानक हुई कार्रवाई में भगदड़ मच गई, जिससे करीब सात किसान घायल हो गए।


करणी सेना परिवार के इंदौर जिला अध्यक्ष ऋषिराज सिंह सिसोदिया और प्रदर्शनकारी किसानों ने आरोप लगाया कि वे पिछले तीन वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं और 50 से अधिक ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। सिसोदिया के अनुसार, ग्रेटर रिंग रोड परियोजना से 39 गांवों की लगभग 4,442 हेक्टेयर जमीन प्रभावित हो रही है, जिससे 991 किसान सीधे तौर पर बेघर और भूमिहीन होने की कगार पर हैं। प्रभावित इलाके में जमीन का मौजूदा बाजार मूल्य 1 करोड़ से 3.5 करोड़ रुपए प्रति एकड़ है, जबकि प्रशासन उन्हें महज 18 लाख से 42 लाख रुपए प्रति एकड़ का मुआवजा देकर छल कर रहा है। किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर और प्रशासनिक दबाव बनाकर जबरन रजिस्ट्रियां कराने का काम भी किया गया है।


किसान राम मकवाना और रवींद्र कन्नौजिया ने बताया कि आंसू गैस के गोले दागने और पुलिस के बल प्रयोग से कई किसानों के पैर और कंधे पर चोटें आई हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल भिजवाना पड़ा। किसानों ने कहा कि वे 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ और इंदौर-देवास रिंग रोड जैसे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अपनी उपजाऊ और सिंचित जमीनों का उचित मूल्य पाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। वहीं, पुलिस कार्रवाई से गुस्साए किसान अब बरलाई जागीर में धरने पर बैठ गए। किसानों ने ऐलान किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन जारी रहेगा।


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