28 Sep 2026
नई दिल्ली, 28 सितंबर (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों धड़ों के लिए चुनाव चिन्ह विवाद को निपटाने के लिए समय-सीमा तय कर दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सोमवार को कहा कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के लिए चार हफ्ते और उसके बाद फैसला करने के लिए तीन महीने का समय मुकर्रर किया है।
हालांकि, आयोग के वकील ने इस पर फैसले के लिए छह महीने का समय दिए जाने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने उनके इस अनुरोध को ठुकरा दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगर ज्यादा दिक्कत होगी तो आप हमारे पास आ सकते हैं।
इससे पहले 24 सितंबर को सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि निर्वाचन आयोग इस मामले पर फैसला करने में देरी कर रहा है। उन्होंने सुझाव दिया था कि इस मामले पर निर्वाचन आयोग को रोजाना सुनवाई करनी चाहिए।
ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस के दो विरोधी गुटों के बीच विवाद के चलते पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया गया था। निर्वाचन आयोग ने 18 सितंबर को दोनों विरोधी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित करने का आदेश दिया था।
फिलहाल, निर्वाचन आयोग ने दोनों गुटों को नए नाम और चुनाव चिन्ह भी आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिन्ह दिया गया। विरोधी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और लिफाफे का चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया। छह अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव हो रहा है।
जून में 58 बागी विधायकों ने ममता गुट के उम्मीदवार सोवनदेब चट्टोपाध्याय की जगह पार्टी से निकाले गए नेता ऋतब्रत बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना था और स्पीकर से मान्यता भी हासिल कर ली। पार्टी के 28 साल के इतिहास में यह पहली बार था, जब उसमें फूट पड़ी। कुछ ही दिन बाद ये बगावत संसद तक पहुंच गई। काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में 20 लोकसभा सांसदों ने कम जानी-मानी एनसीपीआई का दामन थाम लिया और स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को एक अलग गुट के तौर पर समर्थन दिया, जिससे पार्टी के संसदीय खेमे में दरार और गहरी हो गई।