28 Sep 2026
नई दिल्ली, 28 सितंबर (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की तीन भाषा नीति में कहा है कि इस साल छठी कक्षा के बच्चों को भी वही छूट दी जाए, जो सातवीं कक्षा के बच्चों को दी गई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि देश के अधिकांश शिक्षण संस्थान इसी सत्र से इसे लागू करने के पक्ष में हैं।
उच्चतम न्यायालय के इस आदेश का मतलब यह है कि सीबीएसई की तीन भाषा नीति पूरे तरीके से 2027-28 के शिक्षण सत्र से ही लागू हो सकेगी। इससे पहले 17 सितंबर को भी कोर्ट ने कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने पर विचार करने को कहा था। कोर्ट ने कहा था कि चूंकि ये एक राष्ट्रीय नीति है, इसलिए इसमें एक तय संस्थागत ढांचा काम करता है। अगर कक्षा 7 से 10 तक के छात्रों को छूट दी गई है तो कक्षा 6 के छात्रों को ये राहत क्यों नहीं दी जा सकती।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि कक्षा 6 के छात्रों को चार साल बाद बोर्ड परीक्षा का सामना करना है, इसलिए उन्हें अभी से तैयार करने की जरूरत है। केंद्र सरकार ने कहा कि इस पूरे मामले और तीन भाषा नीति से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर विचार करने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है।
याचिका छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों की ओर से दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि सीबीएसई की नई तीन भाषा नीति में नौंवी कक्षा से दो और भाषाओं को पढ़ना अनिवार्य बनाया गया है। इन तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करना जरूरी है। याचिका में कहा गया था कि अचानक कक्षा नौ के छात्रों को दो अतिरिक्त भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करना उनकी दसवीं बोर्ड की तैयारी प्रभावित कर सकता है। वे अचानक दो भाषाएं कैसे सीख जाएंगे और दसवीं में उनकी परीक्षा देंगे। इससे छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।