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तमिलनाडु विधानसभा सत्र: राज्यपाल ने अभिभाषण में कई अप्रमाणित आरोप और भ्रामक बयान होने का आरोप लगाया

20 Jan 2026



चेन्नई, 20 जनवरी (हि.स.)। चेन्नई, 20 जनवरी (हि.स.)। तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि ने मंगलवार को वर्ष के पहले विधानसभा सत्र के शुभारम्भ अवसर पर परंपरागत अभिभाषण दिए बिना राज्य विधानसभा से वॉकआउट कर दिया। विधानसभा में उन्होंने कहा कि वे निराश हैं क्योंकि राष्ट्रगान को उचित सम्मान नहीं दिया गया। राज्यपाल ने आरोप लगाया कि उनका माइक बंद कर दिया गया और उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई।


लोक भवन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि राज्य सरकार की ओर से तैयार किए गए अभिभाषण में कई अप्रमाणित आरोप और भ्रामक बयान शामिल हैं तथा जनता से जुड़े अनेक गंभीर मुद्दों की अनदेखी की गई है।


विज्ञप्ति में राज्य सरकार के 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के दावों को भी सच्चाई से दूर बताया गया। इसमें कहा गया कि कई एमओयू केवल कागजी हैं और वास्तविक निवेश बहुत सीमित है। निवेश के आंकड़े दर्शाते हैं कि तमिलनाडु निवेशकों के लिए कम आकर्षक होता जा रहा है। चार वर्ष पहले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त करने वाले राज्यों में चौथे स्थान पर रहा तमिलनाडु अब छठे स्थान पर बना रहने के लिए संघर्ष कर रहा है।


राज्यपाल के वॉकआउट को महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों से भी जोड़ा गया। विज्ञप्ति में आरोप लगाया गया कि सरकार इस गंभीर समस्या की अनदेखी कर रही है, जबकि पोक्सो अधिनियम के तहत बलात्कार के मामलों में 55 प्रतिशत से अधिक और महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामलों में 33 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।


राज्यपाल ने युवाओं में नशीले पदार्थों और ड्रग्स के बढ़ते सेवन पर भी चिंता जताई और कहा कि इस समस्या को केवल सतही तौर पर टाला जा रहा है। इसके अलावा दलितों पर अत्याचार और दलित महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में तेजी से वृद्धि का भी उल्लेख किया गया।


विज्ञप्ति में कहा गया कि राज्य में एक वर्ष में लगभग 20,000 लोगों ने आत्महत्या की है, जो प्रतिदिन औसतन 65 आत्महत्याओं के बराबर है। इसमें दावा किया गया कि देश में कहीं और स्थिति इतनी गंभीर नहीं है और तमिलनाडु को ‘भारत की आत्महत्या राजधानी’ कहा जा रहा है।


राज्यपाल ने शिक्षा के स्तर में गिरावट, शैक्षणिक संस्थानों में कुप्रबंधन और स्थानीय स्वशासन की उपेक्षा का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हजारों ग्राम पंचायतें वर्षों से चुनाव न होने के कारण निष्क्रिय पड़ी हैं, जिससे करोड़ों लोग जमीनी स्तर की लोकतांत्रिक व्यवस्था से वंचित हैं।


इसके अलावा राज्य में हजारों मंदिरों में न्यासी मंडल न होने और उनके सीधे सरकारी नियंत्रण में होने का मुद्दा भी उठाया गया। राज्यपाल ने आरोप लगाया कि प्राचीन मंदिरों के संरक्षण और पुनरुद्धार को लेकर मद्रास उच्च न्यायालय के निर्देश पांच वर्ष बाद भी लागू नहीं किए गए हैं।


विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि एमएसएमई क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लागतों के दबाव में है, जिसके चलते तमिलनाडु के उद्यमी अपने उद्योगों को अन्य राज्यों में स्थानांतरित करने को मजबूर हो रहे हैं। इन्हीं कारणों को राज्यपाल आर.एन. रवि के विधानसभा से वॉकआउट का आधार बताया गया है।-

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