29 Sep 2026
नई दिल्ली, 28 सितंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। दिल्ली स्थित भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) की ओर से आयोजित 14 दिवसीय ‘हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह’ में तीन देशों के विद्यार्थियों ने हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस कार्यक्रम 30 देशों के विदेशी विद्यार्थी शामिल थे। उन्होंने भारत के प्रति अपना गहरा लगाव और अनुभव साझा किए।
आईसीसीआर के अनुसार सोमवार को आयोजित कार्यक्रम का विषय 'भारत मेरे दिल में बसता है' था। ये सभी छात्र देश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में आईसीसीआर छात्रवृत्ति के तहत अध्ययन कर रहे हैं। हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार जनुदि वीररवे (श्रीलंका), द्वितीय पुरस्कार सबरीना (उज़्बेकिस्तान), तृतीय पुरस्कार वेलेरिया (यूक्रेन), सांत्वना पुरस्कार उज़्बेकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल के प्रतिभागियों को दिया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने हिंदी के समृद्ध सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य, मानवीय संवेदनाओं तथा वैश्विक प्रसार पर प्रेरणादायी व्याख्यान दिए।"
इस मौके पर विदेश विद्यार्थियों ने कहा, “भारत हमारे दिल में बसता है। हमने इसे केवल एक देश के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति, संगीत, योग, कला और मानवीय संबंधों के रूप में महसूस किया है।
समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भारत की भाषाई विविधता हमारी कमजोरी नहीं, बल्कि देश की सबसे बड़ी शक्ति और सांस्कृतिक पूंजी है। उन्होंने रेखांकित किया कि योग, आयुर्वेद और भारतीय ज्ञान परंपरा का वैश्विक प्रसार अपनी भाषाओं के माध्यम से ही सबसे सशक्त रूप में संभव है।
समारोह में आईसीसीआर की महानिदेशक नंदिनी सिंगला ने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, संवेदना और विविधता को दुनिया से जोड़ने वाला एक वैश्विक सेतु है। विदेशी छात्रों की सक्रिय भागीदारी भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करती है। आईसीसीआर का मुख्य उद्देश्य योग, ध्यान, शास्त्रीय संगीत और कला के जरिए भारत के आध्यात्मिक एवं शांति के संदेश को पूरे विश्व में पहुंचाना है।
आईसीसीआर के अपर महानिदेशक डॉ. राजेश रंजन ने इस बात पर बल दिया कि इस आयोजन का मूल उद्देश्य "फ़ाइलों से निकलकर दिलों को जोड़ना था। उन्होंने कहा कि हिंदी आज केवल गंगा किनारे की भाषा नहीं रह गई है, बल्कि यह वोल्गा, राइन और अमू दरिया के किनारों तक बह रही है। इन विदेशी छात्रों के माध्यम से हिंदी का जो अंतरराष्ट्रीय विस्तार हुआ है, वह भारत और दुनिया के सांस्कृतिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा।
समापन समारोह में कला, संस्कृति, संगीत, साहित्य और चिकित्सा क्षेत्र की सात पद्मश्री सम्मानित हस्तियों ने सहभागिता की। इस मौके पर सीएंडएसपी की ओर से साहित्य, कला और चिकित्सा जगत की पद्मश्री सहित 10 हस्तियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इनमें पद्मश्री प्रो. अशोक चक्रधर, पद्मश्री डॉ. रंजना गौहर, पद्मश्री डॉ. जतिन दास, पद्मश्री डॉ. मोहसिन वली एवं पद्मश्री वी.एस. मेहता, पद्मश्री डॉ. दिनेश भार्गव, पद्मश्री डॉ. पुरूषोत्तम दधीच (पुरु), पद्मश्री भेरू सिंह चौहान, प्रो. विमलेश कांति वर्मा और अनिता वर्मा शामिल हैं। इन विभूतियों ने विदेशी छात्रों के साथ सीधा संवाद किया और अपने प्रेरक अनुभवों से उनका मार्गदर्शन किया। 14 से 28 सितंबर तक चले इस पखवाड़े में पहली बार विदेशी छात्रों को विशेष रूप से शामिल किया गया।
कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी सहित देश के शीर्ष संस्थानों में पढ़ रहे उज़्बेकिस्तान, यूक्रेन, रूस, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, मिस्र, कोस्टा रिका, कज़ाकिस्तान, लेसोथो, ताजिकिस्तान, भूटान, म्यांमार और चीन के विद्यार्थी मौजूद रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी में पीएचडी कर रहीं उज़्बेकिस्तान और यूक्रेन की छात्राओं में जिलोला, सबरीना, वेलेरिया और डायना ने अपने विचार साझा किए। वहीं जर्मनी और जापान (मिजोकामी) के अंतरराष्ट्रीय केंद्रों से जुड़े हिंदी प्रेमियों के विशेष वीडियो संदेश भी दिखाए गए।
इसके अलावा, "मुझमें भारत बसता है" तथा हिंदी निबंध लेखन जैसी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मंच से प्रमाण-पत्र और पुरस्कार वितरित किए गए। हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता के लिए प्रथम पुरस्कार जनुदि वीररवे (श्रीलंका), द्वितीय पुरस्कार सबरीना (उज़्बेकिस्तान), तृतीय पुरस्कार वेलेरिया (यूक्रेन), सांत्वना पुरस्कार उज़्बेकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल के प्रतिभागियों को दिया गया। वहीं, यूक्रेन, उज़्बेकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और ताजिकिस्तान के अन्य उत्कृष्ट प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र दिए गए। ऑनलाइन एवं अंतरराष्ट्रीय लेखन प्रतियोगिता में ईरान, कम्बोडिया, थाईलैंड, बांग्लादेश और नेपाल के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
यह आयोजन भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति का उत्कृष्ट उदाहरण बना, जहां दुनिया के विभिन्न महाद्वीपों से आए विद्यार्थियों ने हिंदी को विश्व बंधुत्व की भाषा के रूप में स्थापित किया।