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आधुनिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं: सीपी राधाकृष्णन

12 Apr 2026


नई दिल्ली, 12 अप्रैल (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को कहा कि आधुनिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। जब विकास और विरासत साथ-साथ चलते हैं तभी राष्ट्र का सर्वांगीण उत्थान संभव होता है।


उपराष्ट्रपति ने यह बात नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में विषय "विज्ञान और प्रौद्योगिकी के हस्तक्षेप के माध्यम से आदिवासी जीवन का परिवर्तन - भाषा, आस्था और संस्कृति का संरक्षण" विषय पर आयोजित एक सम्मेलन के उद्घाटन पर कही। यह सम्मेलन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा नॉर्थ ईस्ट सेंटर फॉर टेक्नोलॉजी एप्लीकेशन एंड रीच (एनईसीटीएआर) और आईटीआईटीआई दून संस्कृति स्कूल, देहरादून के सहयोग से आयोजित किया गया।


उन्होंने कहा, "2047 तक भारत को विकसित बनाने का मतलब अपनी संस्कृति को भूलना नहीं है। 'विकास भी, विरासत भी' के सिद्धांत का अर्थ है कि हम आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए भी अपनी पुरानी परंपराओं को सुरक्षित रखेंगे, क्योंकि ये दोनों एक-दूसरे को पूरा करते हैं।"


उपराष्ट्रपति ने कहा कि जब आधुनिक विज्ञान भाषा, आस्था और संस्कृति के साथ सामंजस्य में काम करता है, तो यह संरक्षण और सशक्तिकरण की एक शक्तिशाली शक्ति बन जाता है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों के पास अमूल्य पारंपरिक ज्ञान है जो जैव विविधता और वन संसाधनों के सतत उपयोग में सहायक है। सदियों से इन समुदायों ने भारत की प्राचीन संस्कृति, आस्था और सभ्यतागत विरासत को संरक्षित रखा है।


उपराष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में हरित आर्थिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। आदिवासी समुदायों के डिजाइन, वस्त्र और रंग संयोजन में असाधारण कौशल है, जो पीढ़ियों से संरक्षित है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को जनजातीय मामलों के मंत्रालय की स्थापना के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इसे आदिवासी समुदायों के लिए न्याय, सम्मान और अवसर के प्रति नैतिक प्रतिबद्धता बताया।


सरकार की प्रमुख पहलों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री-जनमान कार्यक्रम का जिक्र किया, जिसके तहत लगभग 7,300 किलोमीटर लंबी 2,400 से अधिक सड़कों और 160 से अधिक पुलों को मंजूरी दी गई है। उन्होंने धरती आभा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का भी उल्लेख किया, जो स्वच्छ जल, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और स्थायी आजीविका पर ध्यान केंद्रित करते हुए 63 हजार से अधिक आदिवासी गांवों को कवर करता है।


सीपी राधाकृष्णन ने उत्तर पूर्वी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में हुए महत्वपूर्ण विकास को रेखांकित किया और समावेशी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।


इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू, अरुणाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री चौना मीन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर और पूर्व सांसद एवं आईटीआईटीआई दून संस्कृति स्कूल के संस्थापक ट्रस्टी तरूण विजय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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