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बंगाल में निजी अस्पतालों के 15 प्रतिशत बिस्तर गरीबाें के लिए होंगे आरक्षित : शुभेंदु अधिकारी

30 May 2026



कोलकाता, 30 मई (एजेंसी)। पश्चिम बंगाल सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के उद्देश्य से राज्य के सभी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में कम से कम 15 प्रतिशत बिस्तर जरूरतमंद मरीजों के लिए आरक्षित रखने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा शनिवार को साल्ट लेक स्थित बिधाननगर उपमंडलीय अस्पताल में किशोरियों के लिए निःशुल्क मानव पैपिलोमा विषाणु (एचपीवी) टीकाकरण कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान की।


मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में आरक्षित किए जाने वाले ये बिस्तर गरीब मरीजों के निःशुल्क उपचार तथा उन परिस्थितियों में उपयोग किए जाएंगे, जब सरकारी अस्पतालों में बिस्तर उपलब्ध नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।


स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत 527 करोड़ प्राप्त हुए हैं, जबकि आयुष्मान भारत योजना के लिए अतिरिक्त 976 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इस योजना के तहत राज्य के लगभग 1.36 करोड़ परिवारों को नकदरहित उपचार की सुविधा मिलेगी।


मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के लाभार्थी देशभर के सभी एम्स और अन्य सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा, दूसरे राज्यों में कार्यरत प्रवासी श्रमिकों को भी इस योजना के दायरे में शामिल किया जाएगा ताकि उन्हें कार्यस्थल पर भी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।


मुख्यमंत्री ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए संचालित स्वास्थ्य इकाइयों का नाम बदलकर “आयुष्मान मंदिर” रखने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ दवाओं की लागत कम करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।


प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि खुले बाजार में 1000 रुपये तक की दवाएं जन औषधि केंद्रों पर लगभग 100 रुपये में उपलब्ध हो सकती हैं। वर्तमान में राज्य में 767 जन औषधि केंद्र संचालित हैं, जहां कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों की जेनेरिक दवाएं रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।


मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दे रही है। उनका कहना था कि प्रयास किया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के लोगों को इलाज के लिए अन्य राज्यों, विशेषकर दक्षिण भारत के शहरों की यात्रा न करनी पड़े और उन्हें राज्य में ही उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों।


राज्य सरकार का मानना है कि इन पहलों से विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को गुणवत्तापूर्ण, सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।