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भारत के घरों में है दुनिया के 10 सबसे बड़े गोल्ड रिजर्व से भी ज्यादा सोना, एसोचैम ने घर में पड़े सोने को अर्थतंत्र में शामिल करने की दी सलाह

11 Apr 2026



नई दिल्ली, 11 अप्रैल (हि.स.)। देश की अर्थव्यवस्था की जब भी बात होती है, तो गोल्ड रिजर्व की बात भी प्रमुखता से उठाई जाती है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार भारत के पास फिलहाल दुनिया का आठवां सबसे बड़ा गोल्ड रिजर्व है। देश के केंद्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के पास 880 टन सोने का भंडार है। हालांकि एसोसिएटेड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ऑफ इंडिया (एसोचैम) का कहना है कि आरबीआई के गोल्ड रिजर्व के अतिरिक्त भारतीय नागरिकों के घर में रखा हुआ सोना दुनिया के 10 सबसे बड़े गोल्ड रिजर्व वाले देश के कुल गोल्ड रिजर्व से भी अधिक है।


एसोचैम की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न स्रोतों के मुताबिक भारतीय घरों में रखे सोने का अनुमानित मूल्य लगभग पांच लाख करोड़ डॉलर है। व्यक्तिगत संग्रह के रूप में रखे गए सोने का ये भंडार घरों या लोगों की वित्तीय संपत्ति के सबसे बड़े भंडारों में से एक है। अगर सोने की इतनी बड़ी मात्रा को देश के अर्थतंत्र में लगाया जाए, तो ये भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ी ताकत दे सकती है। एसोचैम की रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने का मूल्य, अमेरिका और चीन को छोड़ कर दुनिया की लगभग सभी अर्थव्यवस्थाओं के सालाना सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से भी अधिक है।


रिपोर्ट के अनुसार यदि घरों में रखे सोने के भंडार से हर साल दो प्रतिशत हिस्से को भी वित्तीय माध्यमों के जरिये देश के अर्थतंत्र में शामिल किया जाए, तो 2047 तक भारत की जीडीपी में इसके जरिये ही 7.5 लाख करोड़ डॉलर तक की बढ़ोतरी की जा सकती है। फिलहाल 2047 तक भारत की जीडीपी के 34 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचने का अनुमान (कई अलग अलग अनुमानों की मीन वैल्यू) जताया गया है। इसमें अगर घरों में पड़े सोने के दो प्रतिशत हिस्से का भी सालाना योगदान हो जाए, तो भारत की जीडीपी 40 लाख करोड़ डॉलर के स्तर को पार सकती है।


एसोचैम की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के घरों में लोगों के पास रखा ज्यादातर सोना फिजिकल फॉर्म में ही है, जिससे देश के अर्थतंत्र में इसकी उपयोगिता सीमित हो जाती है। देश के अर्थतंत्र को और तेजी से आगे बढ़ाने के लिए एसोचैम ने घरों में रखे सोने को मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि के विकास जैसे अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में औपचारिक रूप से लगाने की बात पर जोर दिया है।


रिपोर्ट में कहा गया है कि घरों में रखे सोने को औपचारिक आर्थिक प्रणाली में लगाने के लिए गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम्स, गोल्ड लोन स्कीम्स या सोने से जुड़े बचत साधनों का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसा होने के अर्थतंत्र के लिए लगभग अनुपयोगी माना जाने वाला घरों में पड़ा सोना धीरे धीरे गोल्ड लोन, गोल्ड सेविंग्स और गोल्ड मोनेटाइजेशन जैसे वित्तीय माध्यमों के जरिये देश के अर्थतंत्र में शामिल होकर देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में काफी योगदान दे सकता है।