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हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में 443 अनपढ़ भी जीते चुनाव, 13 हज़ार से ज्यादा मैट्रिक पास प्रतिनिधि निर्वाचित

03 Jun 2026


शिमला, 03 जून (एजेंसी)। हिमाचल प्रदेश के पंचायत चुनावों ने इस बार ग्रामीण लोकतंत्र की एक ऐसी तस्वीर सामने रखी है, जिसमें डिग्रीधारक भी हैं और ऐसे जनप्रतिनिधि भी, जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते। राज्य की 3,754 पंचायतों में 26, 28 और 30 मई को तीन चरणों में हुए चुनावों के बाद 30 हजार से अधिक जनप्रतिनिधि निर्वाचित होकर सामने आए हैं। इनमें पंचायत प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति (बीडीसी) सदस्य और जिला परिषद सदस्य शामिल हैं। चुनाव परिणामों के बाद जारी आंकड़े बताते हैं कि गांवों की राजनीति में शिक्षा महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन मतदाताओं का भरोसा केवल डिग्रियों पर नहीं टिका है।


राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार पंचायतों में कुल 924 अनपढ़ उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। इनमें 443 अनपढ़ उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे हैं। यह कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों का 1.43 प्रतिशत हिस्सा है। संख्या भले ही बहुत बड़ी न हो, लेकिन यह बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक स्वीकार्यता, लोगों से जुड़ाव, अनुभव और स्थानीय स्तर पर कामकाज की पहचान आज भी चुनावी सफलता के महत्वपूर्ण आधार हैं। यही वजह है कि औपचारिक शिक्षा न होने के बावजूद सैकड़ों उम्मीदवार मतदाताओं का विश्वास जीतकर पंचायतों तक पहुंचे हैं।हालांकि पंचायतों की नई तस्वीर में सबसे बड़ा वर्ग मैट्रिक पास प्रतिनिधियों का है। आंकड़ों के मुताबिक 31,778 मैट्रिक पास उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई। इनमें 13 हज़ार से ज्यादा चुनाव जीतने में सफल रहे। निर्वाचन आयोग के मुताबिक 13,786 निर्वाचित जनप्रतिनिधि मैट्रिक पास हैं, जो कुल संख्या का 44.46 प्रतिशत हैं। यानी पंचायतों में चुने गए लगभग हर दो में से एक प्रतिनिधि दसवीं पास है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि ग्रामीण नेतृत्व में बुनियादी शिक्षा प्राप्त लोगों की मजबूत उपस्थिति बनी हुई है।


मैट्रिक पास प्रतिनिधियों के बाद दूसरा सबसे बड़ा वर्ग उच्च माध्यमिक शिक्षित प्रतिनिधियों का है। प्रदेश भर में 7,176 उम्मीदवार 12वीं पास योग्यता के साथ चुनाव जीतकर आए हैं, जो कुल निर्वाचित प्रतिनिधियों का 23.14 प्रतिशत हिस्सा हैं। वहीं 5,749 प्रतिनिधि ऐसे हैं जिनकी शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक से कम है। इनकी हिस्सेदारी 18.54 प्रतिशत दर्ज की गई है।


उच्च शिक्षा प्राप्त प्रतिनिधियों की संख्या भी उल्लेखनीय है। आंकड़ों के अनुसार 2,605 स्नातक उम्मीदवार चुनाव जीतकर पंचायतों तक पहुंचे हैं, जो कुल का 8.40 प्रतिशत हैं। इसके अलावा 1,251 स्नातकोत्तर डिग्रीधारक प्रतिनिधि भी निर्वाचित हुए हैं और उनकी हिस्सेदारी 4.03 प्रतिशत है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पंचायतों में एक ओर उच्च शिक्षित वर्ग की मौजूदगी बढ़ रही है तो दूसरी ओर कम शिक्षित और अनपढ़ वर्ग भी प्रतिनिधित्व हासिल कर रहा है।


चुनावी आंकड़े पंचायतों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की भी कहानी बताते हैं। कुल 16,691 महिलाएं विभिन्न पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित हुई हैं, जो कुल प्रतिनिधियों का 53.85 प्रतिशत हैं। दूसरी ओर 14,320 पुरुष प्रतिनिधि चुने गए हैं। इससे साफ है कि गांवों की सरकार में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और वे नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में पहुंच रही हैं।


आयु वर्ग के आंकड़े भी दिलचस्प हैं। सबसे अधिक 10,850 प्रतिनिधि 31 से 40 वर्ष आयु वर्ग से चुने गए हैं। इसके बाद 41 से 50 वर्ष आयु वर्ग के 9,750, 21 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 4,077, 51 से 60 वर्ष आयु वर्ग के 4,795 और 60 वर्ष से अधिक आयु के 1,539 प्रतिनिधि निर्वाचित हुए हैं। आर्थिक पृष्ठभूमि के लिहाज से 201 आयकरदाता चुनाव जीतकर आए हैं, जबकि 27,581 प्रतिनिधि एपीएल परिवारों और 2,096 प्रतिनिधि बीपीएल परिवारों से जुड़े हैं।




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