27 Jan 2026
धारूहेड़ा, 27 जनवरी (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। राजस्थान के खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र से निकल रहा रसायनिक और जहरीला औद्योगिक कचरा अब गंभीर पर्यावरणीय संकट का रूप लेता जा रहा है। इस प्रदूषण के चलते न केवल आसपास की कृषि भूमि और भूजल प्रभावित हो रहा है, बल्कि इसके हरियाणा के गांवों—नंदरामपुर बास, जडथल और सहाबी नदी क्षेत्रों ओर मसानी बैराज तक पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राजस्थान सरकार, मुख्यमंत्री राजस्थान, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा डीसी खैरथल को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के आगमन के दौरान शनि मंदिर के पास बड़ी मात्रा में बिना उपचारित, रसायनयुक्त और जहरीला औद्योगिक पानी खुलेआम सड़कों पर बहता हुआ देखा गया। यह दूषित पानी आगे खेतों और खाली जमीन की ओर बह रहा था, जिसके साहबी नदी कैचमेंट एरिया तक पहुंचने की पूरी संभावना है।स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय से औद्योगिक इकाइयों द्वारा गंदे रसायनिक पानी की खुले में निकासी की जा रही है।
इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं, जिससे उपजाऊ कृषि भूमि खराब हो रही है। भूजल के प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया है। इंसानों और पशुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। इसे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 का सीधा उल्लंघन बताया गया है। औद्योगिक इकाइयों की लापरवाही और नियामक एजेंसियों की निष्क्रियता पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
ये मांगें उठाईं गईं स्थानीय निवासी प्रकाश यादव ने स्पष्ट किया है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो इस मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और अन्य न्यायिक मंचों पर उठाया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।