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नई औद्योगिक क्रांति के पथ पर भारत

27 Sep 2026

-प्रहलाद सबनानी


भारत में आज एक नई औद्योगिक क्रांति प्रारम्भ हो चुकी है। यह विचार अमेरिका की जानी-मानी निवेश बैंकिंग संस्था जेफरीज ने व्यक्त किया है। भारत में विशेष रूप से डाटा सेंटर स्थापित करने के उद्देश्य से करोड़ों अमेरिकी डॉलर का निवेश होता दिखाई दे रहा है। डाटा सेंटर स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से टैक्स में भारी छूट भी प्रदान की जा रही है। ऐसे में भारत में डाटा सेंटर स्थापित करने की होड़ दिखाई दे रही है। पिछले पांच वर्षों के दौरान भारत में डाटा सेंटरों की क्षमता दोगुनी हो चुकी है और आने वाले पांच वर्षों में इसके बढ़कर 10 जीडब्ल्यू तक पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही है। वैश्विक स्तर पर डाटा सेंटर अब एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभर रहा है।


साथ ही, भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन इकाइयों को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत लाभ प्रदान किया जा रहा है। इसके लिए 1,300 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि निर्धारित की गई है। इसका परिणाम यह है कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में विनिर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए भारत में 2,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश किया जा चुका है और यह निवेश आगे भी जारी रहने की संभावना है।


भारत आज उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिनके पास अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित नवीनतम तकनीक उपलब्ध है। भारत में स्पेस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था वर्ष 2030 तक पांच गुना तक बढ़ सकती है। वैश्विक स्तर पर एयरोस्पेस क्षेत्र में मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन के चलते भारत लाभ की स्थिति में पहुंच गया है। कम लागत और कुशल इंजीनियरिंग टैलेंट भारत की महत्वपूर्ण ताकत बनकर उभरा है।


इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भारत अब केवल पुर्जों को जोड़कर उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं है बल्कि इस क्षेत्र में उच्चस्तरीय उत्पादों का निर्माण भी करने लगा है। अगले छह वर्षों में मोबाइल कंपोनेंट्स में घरेलू वैल्यू एडिशन लगभग 20 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत तक होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। सोलर क्षेत्र में भारत आज वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा सोलर पीवी उत्पादक देश बन गया है। इसका परिणाम यह है कि वर्तमान में भारत में 35 GW की सोलर क्षमता चालू है, जबकि 100 जीडब्ल्यू की क्षमता पर निर्माण कार्य चल रहा है।


एशिया की सबसे बड़ी 100 कंपनियों की सूची में आज भारत की 34 कंपनियां शामिल हो चुकी हैं। कुल मिलाकर, पहले भारत फार्मा, टेक्सटाइल, चमड़ा उत्पाद, कृषि उत्पाद, मसाले, स्टील, ऑटोमोबाइल और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर उत्पादों का निर्यात करने में सफल हो रहा था। अब परिस्थितियां बदल रही हैं। डाटा सेंटर, सेमीकंडक्टर उत्पादन, स्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी भारत तेजी से वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ रहा है।


भारत बन रहा है वैश्विक योग्यता केंद्र


भारत में उपलब्ध प्रतिभा और श्रमशक्ति के भरोसे विश्व की कई बड़ी कंपनियों के बीच भारत में विशाल वैश्विक योग्यता केंद्र स्थापित करने की होड़ दिखाई दे रही है। ब्रिटेन की फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने चेन्नई में एक विशाल वैश्विक योग्यता केंद्र स्थापित किया है। बैंक ऑफ अमेरिका ने अपना सबसे बड़ा बैक-ऑफिस कार्यालय पुणे में स्थापित किया है। इस बैंक के दुनियाभर के बैक-ऑफिस संचालन में कार्यरत 11,000 कर्मचारी इस केंद्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।


अमेरिका के सबसे पुराने वित्तीय संस्थानों में से एक बैंक ऑफ न्यूयॉर्क मेलॉन ने पुणे और चेन्नई में वैश्विक योग्यता केंद्र स्थापित किए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कार्य करने वाली बोस्टन की एक कंपनी ने फरवरी 2026 में हैदराबाद में बड़े स्तर पर अपना अंतरराष्ट्रीय कार्यालय स्थापित किया है। बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और पुणे में आज 1,700 से अधिक वैश्विक योग्यता केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इन केंद्रों में 19 लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। भारत अब आउटसोर्सिंग हब से आगे बढ़कर उच्चस्तरीय टैलेंट सेंटर के रूप में स्थापित हो रहा है। भारत में स्थापित कुल वैश्विक योग्यता केंद्रों में लगभग 65 प्रतिशत केंद्र अमेरिकी कंपनियों द्वारा स्थापित किए गए हैं।


इन कंपनियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे अनुसंधान का कार्य इन केंद्रों में सम्पन्न हो रहा है। टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नए उत्पादों का विकास भी इन्हीं केंद्रों में किया जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत अमेरिका की कंपनी ट्रूब्रिज ने भी फरवरी 2026 में मुंबई में वैश्विक योग्यता केंद्र स्थापित किया है। इस केंद्र का आने वाले समय में और विस्तार किया जाना है। इसी प्रकार बीमा, बैंकिंग, स्वास्थ्य, साइबर सिक्योरिटी, फार्मा और सुरक्षा के क्षेत्रों में कार्यरत अनेक कंपनियां भारत में अपने वैश्विक योग्यता केंद्र स्थापित कर रही हैं।


ब्रेन ड्रेन से रिवर्स ब्रेन ड्रेन की ओर


एक समय अमेरिका और अन्य विकसित देशों की ओर भारत से बड़े पैमाने पर ब्रेन ड्रेन हुआ करता था। अब परिस्थितियों में बदलाव दिखाई दे रहा है और भारत रिवर्स ब्रेन ड्रेन की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से अमेरिका की नीतियों के कारण अन्य देशों से अमेरिका जाने वाले टैलेंट के लिए वहां लंबे समय तक रहना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।


इसके साथ ही अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों में जनसंख्या संबंधी परिस्थितियां भी बदल रही हैं। इन देशों में जन्म दर लगातार कम हो रही है। वहां जीवनशैली तेजी से व्यक्तिगत केंद्रित होती जा रही है। विवाह जैसी सामाजिक संस्था के प्रति दृष्टिकोण में भी व्यापक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। पश्चिमी देशों में लिव-इन रिलेशनशिप का चलन बढ़ा है और विवाह को लेकर पारंपरिक सोच में बदलाव आया है। तलाक की दरों में भी कई देशों में वृद्धि दर्ज की गई है।


इन देशों में सामान्य जीवन-यापन की लागत लगातार बढ़ रही है। परिवार बढ़ाने और बच्चों के पालन-पोषण पर होने वाला खर्च भी लोगों के निर्णयों को प्रभावित कर रहा है। इसी संदर्भ में ‘डबल इनकम नो किड्स’ यानी DINK का विचार भी जोर पकड़ रहा है। इसका अर्थ है कि परिवार में दोनों व्यक्ति आय अर्जित करें, पर बच्चे न हों।


भारतीय दर्शन में विवाह को परिवार, समाज और अगली पीढ़ी के निर्माण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण संस्था के रूप में देखा गया है। इसके विपरीत, पश्चिमी समाज में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और व्यक्तिगत सुख को अधिक महत्व दिए जाने के कारण पारिवारिक संरचनाओं में बदलाव दिखाई दे रहा है। पुनर्जन्म और जीवन के आध्यात्मिक उद्देश्य को लेकर भारतीय तथा पश्चिमी दार्शनिक दृष्टिकोणों में भी महत्वपूर्ण अंतर है।


पश्चिमी समाज में बढ़ती भौतिक आवश्यकताओं, जीवन-यापन की लागत और व्यक्तिगत जीवनशैली का प्रभाव परिवार एवं जनसंख्या संरचना पर दिखाई दे रहा है। नागरिकों के सामने यह प्रश्न भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है कि वे अपनी आय और संसाधनों का कितना हिस्सा परिवार तथा बच्चों के पालन-पोषण पर खर्च कर सकते हैं। परिणामस्वरूप कई देशों में परिवार का आकार छोटा होता जा रहा है और जन्म दर में गिरावट देखी जा रही है।


भारत की ओर बढ़ता आकर्षण


आज पश्चिमी देशों के नागरिक, विशेष रूप से प्रौढ़ नागरिक, अपने जीवन के अंतिम चरण को अधिक सहज और शांतिपूर्ण बनाने के उद्देश्य से भारत की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं। भारत की आध्यात्मिक नगरी ऋषिकेश, हरिद्वार तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के अनेक क्षेत्रों में विदेशी नागरिकों की उपस्थिति बढ़ी है। कुछ देशों के नागरिक गोवा जैसे राज्यों में भी आकर बस रहे हैं।


भारत के इन स्थलों पर उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है। प्रारम्भ में अनेक विदेशी नागरिक योग और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के उद्देश्य से भारत आते हैं। भारत में रहने के दौरान उन्हें यहां की जीवनशैली और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव होता है। इसके बाद कुछ लोग भारत में ही लंबे समय तक रहने या बसने का निर्णय लेते हैं।


भारत में तेजी से विकसित हो रही औद्योगिक और तकनीकी क्षमताओं के साथ-साथ यहां की विशाल प्रतिभा, कुशल इंजीनियरिंग क्षमता, अपेक्षाकृत कम लागत और आध्यात्मिक-सांस्कृतिक वातावरण भी वैश्विक स्तर पर भारत के आकर्षण को बढ़ा रहा है। डाटा सेंटर से लेकर सेमीकंडक्टर, स्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक योग्यता केंद्रों तक अनेक क्षेत्रों में भारत का विस्तार इस बात का संकेत है कि देश एक नए औद्योगिक और तकनीकी चरण में प्रवेश कर रहा है।


(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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