04 Nov 2026
नई दिल्ली, 04 नवंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। अदालत की कस्टडी में रह रहे एक बच्चे को रूस ले जाने पर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह उस बच्चे को वापस भारत लाने के लिए तत्काल कदम उठाए। जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने बच्चे की मां और रूसी नागरिक विक्टोरिया बसु के आचरण पर कड़ी आपत्ति जताई। आरोप है कि वह अपने छोटे बेटे के साथ नेपाल के रास्ते भारत से निकल गईं और रूस चली गईं।
न्यायालय ने कहा कि इससे अदालत की गरिमा दांव पर लगी है और मां को इस बात की छूट नहीं दी जा सकती कि वह कार्यवाही के दौरान मिली नरमी का फायदा उठाए। यह मामला विक्टोरिया बसु और उनके पति सैकत बसु के बीच उनके 6 साल के बेटे की कस्टडी को लेकर हुए विवाद से जुड़ा है। विक्टोरिया बसु अपने पति से अलग रह रही है।
विक्टोरिया 2019 से भारत में रह रही थीं। उसने 2023 में उच्चतम न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। उनका आरोप था कि पति के साथ मतभेद होने के बाद उन्हें अपने बेटे से मिलने नहीं दिया जा रहा था। याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कई अंतरिम आदेश जारी किए थे, ताकि माता-पिता अपने बच्चे की कस्टडी साझा कर सकें। शुरुआत में, इस दंपति को दिल्ली के बंग भवन में अलग-अलग रहने की जगह दी गई और उनके मतभेदों को सुलझाने के लिए उन्हें मध्यस्थता के लिए भी भेजा गया।
न्यायालय ने 22 मई, 2025 को संयुक्त कस्टडी की एक व्यवस्था तय की, जिसके तहत बच्चा हफ्ते में तीन दिन अपनी मां के पास और बाकी चार दिन अपने पिता के पास रहेगा। हालांकि, 7 जुलाई, 2025 को पिता ने अदालत को बताया कि मां और बच्चा लापता हैं। दिल्ली पुलिस की जांच से पता चला कि विक्टोरिया दिल्ली से बिहार के नरकटियागंज गई, फिर नेपाल में दाखिल हुई और अंततः संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह होते हुए रूस पहुंच गई।
इन घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए उच्चतम न्यायालय ने एक अगस्त, 2025 को एक आदेश जारी कर स्पष्ट किया था कि व्यावहारिक रूप से बच्चा अदालत की ही कस्टडी में है। न्यायालय ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास से कहे कि वे तुरंत विक्टोरिया और बच्चे से संपर्क करें।