04 Nov 2026
नई दिल्ली, 04 नवंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष को बागी कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है।
उच्चतम न्यायालय ने सप्रे के खिलाफ दायर याचिका पर जल्द फैसला लेने से इनकार करने के उच्च न्यायालय के रुख पर नाराजगी भी जताई।उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि दसवीं अनुसूची के तहत दायर याचिकाओं पर जल्द से जल्द फैसला लिया जाना चाहिए।
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने जुलाई, 2024 में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि सप्रे ने स्वेच्छा से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता छोड़ दी है। वह पार्टी के टिकट पर 2023 के विधानसभा चुनाव में चुनी गई और बाद में भाजपा में शामिल हो गई। वे भाजपा के लिए प्रचार भी कर रही हैं। ऐसे में वे अयोग्य हो चुकी हैं, लेकिन अयोग्यता की याचिका पर फैसला नहीं किया जा रहा है।