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निर्वाचन आयोग के फॉर्म-6 से संबंधित चिंताओं पर सुप्रीम कोर्ट 19 नवंबर को करेगा सुनवाई

निर्वाचन आयोग के फॉर्म-6 से संबंधित चिंताओं पर सुप्रीम कोर्ट 19 नवंबर को करेगा सुनवाई

04 Nov 2026

नई दिल्ली, 04 नवंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह 19 नवंबर को उन चिंताओं पर सुनवाई करेगा, जो निर्वाचन आयोग के उस स्पष्टीकरण को लेकर जताई गई हैं, जिसमें दिल्ली की मतदाता सूची के ड्राफ्ट से नाम छूट जाने वाले मतदाताओं को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान 'फॉर्म 6' भरकर फिर से पंजीकरण कराने की अनुमति दी गई है।


मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि मतदाताओं को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह मामला पहले से ही न्यायिक विचार के अधीन है। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी से कहा कि वे एक उचित आवेदन दायर करें, जिसमें निर्वाचन आयोग के 3 नवंबर के स्पष्टीकरण को रिकॉर्ड पर लाया जाए।


याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने न्यायालय को बताया कि मतदाता इस बात को लेकर डरे हुए हैं कि फॉर्म 6 भरने पर उन पर गलत जानकारी देने का मुकदमा चल सकता है। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि जब हम इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं, तो लोगों को इस तरह डरने की कोई जरूरत नहीं है। न्यायालय ने संकेत दिया कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो वह निर्वाचन आयोग को दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तिथि 25 नवंबर से आगे बढ़ाने के लिए कह सकता है।


उच्चतम न्यायालय में अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी की याचिका में दिल्ली के एसआईआर के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से करीब 47.56 लाख मतदाताओं के नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट श्रेणी के तहत हटाए जाने को चुनौती दी है। निर्वाचन आयोग इन हटाए गए मतदाताओं को फिर से नाम जुड़वाने के लिए 'फॉर्म 6' भरने को कह रहा है। प्रशांत भूषण की दलील है कि फॉर्म 6 विशेष रूप से 'पहली बार' वोटर बनने वालों के लिए होता है, जिसमें यह घोषणा करनी होती है कि आवेदक का नाम पहले कहीं नहीं है। पहले से पंजीकृत मतदाताओं से यह फॉर्म भरवाना उन्हें कानूनन मुसीबत में डाल सकता है।


इससे पहले 28 अक्टूबर की सुनवाई में उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि पहले से रजिस्टर्ड मतदाताओं को नए सिरे से आवेदन करने के लिए मजबूर करना गलत है। न्यायालय ने सुझाव दिया था कि जो लोग अपना आवास बदल चुके हैं, उन्हें पते में सुधार के लिए 'फॉर्म 8' भरने की अनुमति दी जाए।


उधर, निर्वाचन आयोग ने 3 नवंबर को देश के सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को एक स्पष्टीकरण जारी किया है। इसमें आयोग ने दिल्ली उच्च न्यायालय के एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए कहा कि हटाए गए मतदाता पुनः नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 का उपयोग कर सकते हैं और यह "झूठी घोषणा" नहीं माना जाएगा। आयोग ने आश्वासन दिया है कि केवल इस आधार पर किसी भी मतदाता के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या मुकदमा नहीं चलाया जाएगा कि वह पहले भी मतदाता सूची में शामिल था।

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