04 Nov 2026
नई दिल्ली, 04 नवंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीबीआई के छह पूर्व और मौजूदा अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के अपने आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। जस्टिस मिनी पुष्करणा ने कहा कि इस निर्देश पर फिलहाल रोक रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी, 2027 को होगी।
जस्टिस मधु जैन ने 6 अक्टूबर को सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था। इन अधिकारियों पर आरोप था कि उन्होंने एक मामले में भारतीय राजस्व सेवा के एक पूर्व अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल को आरोपमुक्त किए जाने को चुनौती देते समय सरकार के साथ हुए पत्राचार के बारे में अदालत के सामने झूठे बयान दिए थे। कोर्ट ने अशोक कुमार अग्रवाल की याचिका को स्वीकार कर लिया था और सीबीआई के स्पेशल जज को निर्देश दिया था कि वे सुशील दीवान, विनीत विनायक, अमित कुमार, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम और मोहम्मद आजाद के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करें, लेकिन जस्टिस मिनी के ताजा आदेश में कहा गया है कि इस निर्देश पर फिलहाल रोक रहेगी।
जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच ने यह आदेश तब पारित किया, जब सीबीआई के दो पूर्व अधिकारियों सुशील दीवान और रमन त्यागी ने आदेश को वापस लेने की मांग करते हुए याचिका दायर की। याचिका में कहा गया था कि यह फैसला उनकी बात सुने बिना ही दिया गया था। अपील में केवल दीवान ही एक पक्ष थे। उन्होंने दावा किया कि उन्हें गलत ई-मेल आईडी पर नोटिस भेजा गया था। बाकी पांच आरोपितों को तो कभी कोई नोटिस ही नहीं भेजा गया था।
मामला अशोक कुमार अग्रवाल के खिलाफ सीबीआई की ओर से दर्ज किए गए एक केस से जुड़ा है, जिसमें उन पर अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति रखने का आरोप था। जनवरी, 2016 में उच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी को अमान्य करार दिया था, जिसके बाद उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया गया। इसके बाद सीबीआई ने इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने पर विचार किया। हालांकि, जून, 2016 में कानून और न्याय मंत्रालय ने अपनी राय दी कि इस मामले को आगे बढ़ाने का कोई ठोस आधार नहीं है। बाद में जब अग्रवाल ने जांच के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज वापस मांगे, तो सीबीआई ने 2 अगस्त, 2016 के अपने जवाब में कहा कि आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर मंत्रालय के साथ बातचीत चल रही है।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने पाया कि ऐसी कोई बातचीत नहीं चल रही थी। इसकी बजाय, सीबीआई आंतरिक रूप से इस बात पर विचार कर रही थी कि क्या फैसले पर पुनर्विचार की मांग की जाए और कोई और कानूनी राय ली जाए। कोर्ट ने सीबीआई के जवाब के अलग-अलग ड्राफ्ट देखे और पाया कि एक शुरुआती ड्राफ्ट में साफ तौर पर लिखा था कि कार्मिक मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। बाद में इस बात को हटा दिया गया और उसकी जगह हाथ से लिखा गया एक बयान जोड़ दिया गया कि मंत्रालय के साथ बातचीत चल रही