29 Sep 2026
अमेठी, 29 सितंबर (एजेंसी)। अमेठी कस्बे के रेलवे स्टेशन रोड पर मंगलवार शाम स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर सामने आई। बनारस से दोना-पत्तल बेचकर लौट रही वनवासी समुदाय की गर्भवती महिला ज्योति को रेलवे स्टेशन के बाहर अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। मदद पहुंचने से पहले ही उसने सड़क पर जुड़वा बच्चों को जन्म दे दिया। घटना के दौरान महिला के साथ उसका पति मौजूद था, जबकि आसपास के दुकानदारों और राहगीरों ने मदद के लिए मोर्चा संभाला।
बताया जा रहा है कि ज्योति अपने पति के साथ मंगलवार शाम अमेठी रेलवे स्टेशन पहुंची थी। स्टेशन के बाहर पैदल जाते समय अचानक उसे तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। वह सड़क किनारे बैठ गई और कुछ ही देर में उसने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। पति ने महिला को चादर से ढक दिया। महिला की हालत देखकर स्थानीय लोगों ने तत्काल 108 एंबुलेंस को फोन किया।
प्रत्यक्षदर्शी आनंद तिवारी ने बताया कि उन्होंने ही 108 पर फोन कर एंबुलेंस बुलाने की सूचना दी थी। उनके मुताबिक, सीएचसी अमेठी घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर है, बावजूद इसके एंबुलेंस पहुंचने में करीब 25 से 30 मिनट लग गए। तब तक महिला सड़क पर ही दोनों बच्चों को जन्म दे चुकी थी। आनंद तिवारी ने बताया कि महिला और उसका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। शुरुआत में एंबुलेंस से अस्पताल जाने में भी वे झिझक रहे थे। उन्हें इलाज और एंबुलेंस के लिए कोई शुल्क न लगने की जानकारी देने के बाद वे अस्पताल जाने को तैयार हुए। घटना के बाद स्टेशन रोड पर काफी देर तक लोगों की भीड़ जुटी रही। सड़क पर प्रसव की घटना ने स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन सेवाओं और एंबुलेंस की समय पर उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि सीएचसी से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित घटनास्थल तक एंबुलेंस को पहुंचने में इतना समय क्यों लगा?
घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी मनोज पटेल भी अस्पताल से स्टाफ के साथ मौके की ओर पहुंचे। उनके अनुसार, एंबुलेंस के पहुंचने के बाद महिला और दोनों नवजातों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमेठी लाया गया। चिकित्सकों ने जांच के बाद जच्चा और दोनों नवजातों को सुरक्षित बताया। तीनों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।