04 Nov 2026
नई दिल्ली, 4 नवंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए संचालित केंद्र प्रायोजित योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक विस्तार देने की मंजूरी दी है। इस पर कुल 3,788.04 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
योजना के तहत देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतों की संख्या मौजूदा 779 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इनमें विशेष रूप से पॉक्सो मामलों के लिए गठित अदालतें भी शामिल होंगी। सरकार के अनुसार, इस विस्तार से उन जिलों तक न्यायिक सुविधा पहुंचाने में मदद मिलेगी, जहां दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों का लंबित बोझ अधिक है।
निर्भया फंड से मिलेगा केंद्र का हिस्सा
योजना के कुल वित्तीय प्रावधान में केंद्र सरकार का हिस्सा 2,353.15 करोड़ रुपये और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का हिस्सा 1,434.89 करोड़ रुपये होगा। केंद्र का अंश निर्भया फंड से उपलब्ध कराया जाएगा। योजना की अवधि एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निर्धारित की गई है।
प्रत्येक फास्ट ट्रैक अदालत में एक न्यायिक अधिकारी, विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था का प्रावधान है। इससे मामलों की सुनवाई के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यों को भी गति देने का लक्ष्य रखा गया है। विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति का उद्देश्य इन मामलों में प्रभावी पैरवी और समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करना है।
अब तक 4.02 लाख मामलों का निपटारा
केंद्र सरकार के मुताबिक, दो अक्टूबर 2019 को शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 779 फास्ट ट्रैक स्पेशल अदालतें कार्यरत हैं। इनमें 399 विशेष पॉक्सो अदालतें शामिल हैं। योजना के प्रारंभ से अब तक इन अदालतों द्वारा 4,02,457 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
नए विस्तार में अदालतों की संख्या 850 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। अतिरिक्त जिलों का चयन दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों की लंबित संख्या के आधार पर किया जाएगा।
पीड़ितों के अनुकूल न्यायिक व्यवस्था पर जोर
योजना में पीड़ितों, विशेषकर बच्चों के लिए संवेदनशील और अनुकूल न्यायिक वातावरण विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत संवेदनशील गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए विशेष केंद्रों और बाल-अनुकूल अदालतों को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि पीड़ितों को सुनवाई के दौरान अतिरिक्त मानसिक परेशानी से बचाया जा सके।
कानून एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा योजना की निगरानी एफटीएससी डैशबोर्ड, राज्यों की प्रगति रिपोर्ट, व्यय विवरण और उच्च न्यायालयों के साथ समीक्षा बैठकों के माध्यम से की जाएगी। सरकार का लक्ष्य लंबित मामलों में कमी लाने के साथ सुनवाई और निपटारे की दर में सुधार करना है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद शुरू हुई थी योजना
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना दो अक्टूबर 2019 को आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम, 2018 के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2019 के निर्देशों के अनुरूप शुरू की गई थी। शीर्ष अदालत ने पॉक्सो अधिनियम के तहत 100 से अधिक लंबित मामलों वाले जिलों में विशेष अदालतें स्थापित करने का निर्देश दिया था।
योजना को शुरुआत में एक वर्ष के लिए लागू किया गया था, जिसके बाद इसे 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया गया। अब पांच वर्ष के नए विस्तार से दुष्कर्म और बच्चों के यौन अपराधों से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था को निरंतरता मिलेगी।