05 Oct 2026
शिमला, 05 अक्टूबर (एजेंसी) ओलावृष्टि से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली एंटी-हेल गन को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। शिमला जिले के जुब्बल और कोटखाई क्षेत्र में अब सरकारी ही नहीं, निजी तौर पर लगाई गई एंटी-हेल गन भी नहीं चलाई जा सकेगी। हाईकोर्ट ने इन गनों के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत ने यह रोक मामले की पूरी रिपोर्ट सामने आने तक लगाने के निर्देश दिए हैं।
एक घंटे से ज्यादा चली गन, दर्ज हुई भारी बारिश
मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चन्द्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान निदेशक बागवानी की ओर से दाखिल हलफनामे का भी उल्लेख हुआ। हलफनामे के अनुसार जब एक घंटे से अधिक समय तक हेल कंट्रोल सिस्टम चलाया गया, उस दौरान भारी बारिश दर्ज की गई।
अदालत ने इन तथ्यों को देखते हुए एंटी-हेल गन के इस्तेमाल से आसपास के क्षेत्रों में नुकसान होने की आशंका को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पूरी रिपोर्ट आने तक एंटी-हेल गन के संचालन पर रोक रहनी चाहिए।
देवरीघाट और बड़ौनघाट पर भी मांगी रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी रिपोर्ट मांगी है कि एंटी-हेल गन बंद किए जाने के बाद आसपास के क्षेत्रों खासकर देवरीघाट और बड़ौनघाट के नजदीकी इलाकों को कोई फायदा हुआ है या नहीं। अदालत ने इस पहलू की जानकारी भी अगली सुनवाई के दौरान मांगी है।
कोर्ट ने फिलहाल कम से कम एक साल के लिए एंटी-हेल गन का इस्तेमाल रोकने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान मामले से जुड़े तथ्यों और इसके प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा।
नौणी विश्वविद्यालय भी बनेगा जवाबदेह
सुनवाई में यह जानकारी भी सामने आई कि डॉ. वाई.एस. परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन एंटी-हेल गन तकनीक को लेकर अध्ययन कर रहा है। इस अध्ययन को पूरा होने में अभी करीब चार साल और लगने की बात सामने आई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने नौणी विश्वविद्यालय को भी केस में प्रतिवादी बनाया है। अदालत ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार के माध्यम से नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 को होगी। उस दौरान राज्य सरकार और नौणी विश्वविद्यालय की ओर से पेश की जाने वाली रिपोर्ट और जवाब के आधार पर अदालत आगे की सुनवाई करेगी।