26 Oct 2026
नैनीताल, 26 अक्टूबर (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के और ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्रों के बाद दीपावली की जगमग रोशनी के बीच बाजारों में रंग-बिरंगी मोमबत्तियों की मांग बढ़ रही है, ऐसे में हल्द्वानी के पॉलीशीट क्षेत्र की हेमा कोश्यारी कौशिक अपनी हस्तनिर्मित मोमबत्तियों के माध्यम से स्वदेशी उत्पादों और स्वरोजगार की एक प्रेरक कहानी प्रस्तुत कर रही हैं।
ललित कला में दक्ष हेमा ने अपने हुनर को व्यावसायिक स्वरूप देकर ‘ग्लो निर्वाणा कैंडल्स’ नाम से उद्यम शुरू किया है। उनका प्रयास दिखाता है कि पारंपरिक कला, रचनात्मकता और बाजार की जरूरतों को समझकर घर से भी सफल व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है।
हुनर को बनाया आजीविका का आधार
नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में मोमबत्ती निर्माण की कला लंबे समय से स्थानीय पहचान का हिस्सा रही है। यहां तैयार होने वाली आकर्षक मोमबत्तियां पर्यटकों के साथ स्थानीय ग्राहकों को भी लुभाती हैं। इसी परंपरा को आधुनिक डिजाइन और नये प्रयोगों से जोड़ते हुए हेमा ने अपने उद्यम की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के आह्वान से प्रेरित होकर उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अवसरों को आजीविका में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया।हेमा के उद्यम को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी एमएसएमई विभाग के कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों और मार्गदर्शन से भी सहायता मिली। प्रशिक्षण तथा अपने कलात्मक कौशल के मेल से उन्होंने मोमबत्ती निर्माण को व्यवस्थित व्यवसाय का रूप दिया।
प्राकृतिक मोम और आकर्षक डिजाइनों की खासियत
‘ग्लो निर्वाणा कैंडल्स’ के तहत हेमा विभिन्न आकारों, रंगों और सुगंधों वाली हस्तनिर्मित मोमबत्तियां तैयार करती हैं। उनके उत्पादों में सोया वैक्स, मधुमक्खी के मोम और पर्ल वैक्स से बनी जार कैंडल्स, फ्लोटिंग कैंडल्स, दिया कैंडल्स, पिलर कैंडल्स तथा फूलों और मोतियों से प्रेरित आकर्षक डिजाइन शामिल हैं।
दीपावली जैसे पर्व पर इन उत्पादों का विशेष महत्व है। पारंपरिक दियों के साथ सजावटी मोमबत्तियां घरों, पूजा स्थलों और उपहारों के लिए पसंद की जाती हैं। हेमा की कोशिश है कि ग्राहकों को आकर्षक डिजाइन के साथ स्थानीय स्तर पर तैयार हस्तनिर्मित उत्पादों का विकल्प भी मिले।
सोशल मीडिया से बाजार तक पहुंच
अपने उत्पादों की बिक्री के लिए हेमा स्थानीय मेलों, एमएसएमई स्टॉलों और बाजारों के साथ फेसबुक तथा इंस्टाग्राम जैसे डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग करती हैं। इससे उन्हें स्थानीय ग्राहकों के अतिरिक्त अन्य संभावित खरीदारों तक पहुंचने का अवसर मिलता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस व्यवसाय से हेमा लगभग 25 से 30 हजार रुपये की शुद्ध मासिक आय अर्जित कर रही हैं। इससे वह अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के साथ अपने उद्यम को आगे बढ़ाने में भी सक्षम हुई हैं। हालांकि, त्योहारों के दौरान बिक्री और आय में होने वाला वास्तविक बदलाव मांग, उत्पादन और बाजार की परिस्थितियों पर और अधिक होने की उम्मीद है।
स्वयं आत्मनिर्भर बनीं, तीन अन्य लोगों को भी दिया रोजगार
हेमा की उपलब्धि का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि उनका उद्यम केवल उनकी व्यक्तिगत आजीविका तक सीमित नहीं है। इस काम में उन्होंने तीन अन्य महिलाओं अथवा स्थानीय लोगों को भी रोजगार दिया है। इस तरह उनका प्रयास स्वरोजगार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का माध्यम भी बन रहा है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए ऐसे छोटे उद्यम महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। घर या आसपास के क्षेत्र से काम करने की सुविधा, रचनात्मक कौशल का उपयोग और स्थानीय बाजार से जुड़ाव महिलाओं को अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के अवसर देते हैं।
त्योहारों में बढ़ती मांग से नई संभावनाएं
नवरात्र, दीपावली और क्रिसमस जैसे अवसरों पर सजावटी तथा सुगंधित मोमबत्तियों की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे समय में स्थानीय उत्पादकों को अपने डिजाइन, गुणवत्ता और विपणन के माध्यम से बाजार में पहचान बनाने का अवसर मिलता है। प्राकृतिक मोम से तैयार मोमबत्तियों को लेकर ग्राहकों की रुचि भी बढ़ रही है।
स्थानीय उद्यम, आत्मनिर्भरता की मजबूत राह
हेमा कोश्यारी कौशिक की कहानी यह संदेश देती है कि स्थानीय हुनर को सही प्रशिक्षण, बाजार तक पहुंच और निरंतर मेहनत का साथ मिले तो वह आजीविका का मजबूत आधार बन सकता है। उनका उद्यम उत्तराखंड की रचनात्मक क्षमता और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की संभावनाओं को सामने लाता है।
दीपावली की रोशनी के बीच ऐसे प्रयासों का महत्व और बढ़ जाता है। स्थानीय स्तर पर बने उत्पाद खरीदना केवल एक व्यवसायिक विकल्प नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के कारीगरों और छोटे उद्यमियों को प्रोत्साहित करने का तरीका भी है। यदि प्रशिक्षण, विपणन और वित्तीय सहयोग की सुविधाएं छोटे उद्यमियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचें, तो हेमा जैसे प्रयास अधिक लोगों को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित कर सकते हैं।