06 Nov 2026
नई दिल्ली, 06 नवंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे व्यक्तियों को मंत्री बनने या कैबिनेट में महत्वपूर्ण विभाग पाने से रोकने का दिशा-निर्देश जारी करने की मांग करने वाली याचिका आज खारिज कर दी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका खारिज करने का आदेश दिया।
याचिका दिल्ली निवासी दिलीप कुमार ने दायर की थी। याचिका में मांग की गई थी कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को सांसदों और विधायकों को मंत्री बनाते समय या उन्हें कैबिनेट विभाग सौंपते समय उनके आपराधिक रिकॉर्ड पर भी विचार करना चाहिए। याचिका में स्पष्ट किया गया था कि वे संविधान के अनुच्छेद 75 और 164 के तहत कोई नई अयोग्यता जोड़ने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि मंत्रियों के चयन और विभागों के आवंटन में विवेक के विवेकपूर्ण इस्तेमाल के लिए केवल कुछ मानक या मानदंड तय करने का आग्रह कर रहे थे।
याचिकाकर्ता ने 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स' (एडीआर) के 2025 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देश के लगभग 45 प्रतिशत मौजूदा विधायकों पर आपराधिक मामले और 29 प्रतिशत पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसके बावजूद संसद ने इस समस्या से निपटने के लिए एक दशक से कोई पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिशा-निर्देश तय करने की व्यावहारिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आपराधिक कानूनों का राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में यह मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के विवेक पर ही छोड़ा जाना चाहिए कि कोई आपराधिक मामला सरकार के लिए कितना असुविधाजनक या शर्मनाक है कि उस व्यक्ति को कैबिनेट से बाहर रखा जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कार्यपालिका के इस विशेषाधिकार पर कोई भी बदलाव कोर्ट की बजाय राजनीतिक कार्यपालिका और संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है।