06 Nov 2026
नई दिल्ली, 06 नवंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार काे बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी में नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कोई संपत्ति संबंधित कानूनों के तहत एक वैध और अधिसूचित संपत्ति है तो बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए और पूर्व नोटिस दिए उसकी बिजली व पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को नहीं काटा जा सकता।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी रेसकोर्स मस्जिद के इमाम मोहम्मद हारून द्वारा दायर एक नई अपील पर सुनवाई के दौरान की। इससे पहले सिंगल बेंच ने मस्जिद की बिजली-पानी बहाली की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसे अब इस अपील के जरिए चुनौती दी गई है। कोर्ट ने नोटिस जारी कर एनडीएमसी और दिल्ली वक्फ बोर्ड से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को करेगा।
यह विवाद प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) के निकट करीब 53 एकड़ में फैले रेसकोर्स क्लब परिसर के भीतर स्थित ऐतिहासिक मस्जिद से जुड़ा है, जो दिल्ली वक्फ बोर्ड के तहत अधिसूचित संपत्ति है।
याचिकाकर्ता के अनुसार 7 अक्टूबर को बिना किसी पूर्व सूचना के इस परिसर की बिजली और पानी की आपूर्ति अचानक बंद कर दी गई थी। इसके अलावा, सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति पर भी रोक लगी हुई है। मुस्लिम पक्ष को यह आशंका थी कि प्रशासन इस ऐतिहासिक मस्जिद को हटाने या ध्वस्त करने की कार्रवाई कर सकता है।
हालांकि, इस मामले में केंद्र सरकार के भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) ने 29 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय को जानकारी दी थी कि दिल्ली वक्फ बोर्ड के प्रतिवेदन पर फैसला करने में करीब चार सप्ताह का समय लगेगा और तब तक मस्जिद को हटाने या ध्वस्त करने की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।