21 Apr 2026
कोलकाता, 21 अप्रैल (हि. स.)। कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य सरकारी महाविद्यालयों के सहायक प्राध्यापकों को पीठासीन अधिकारी के रूप में चुनाव ड्यूटी करने की अनुमति दे दी। अदालत ने एकलपीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई थी। न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति अजय गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि कुछ प्राध्यापक अदालत पहुंचे हैं, जबकि अन्य कई प्राध्यापक निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार चुनाव ड्यूटी स्वीकार कर चुके हैं। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि समूह ‘ए’ श्रेणी के अधिकारियों को विशेष कारण दर्ज किए बिना चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाया जाना चाहिए, लेकिन सहायक प्राध्यापकों को भी निर्वाचन आयोग की आवश्यकता को समझना चाहिए। इससे पहले 17 अप्रैल को उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने कुछ सहायक प्राध्यापकों की पीठासीन अधिकारी के रूप में नियुक्ति रद्द कर दी थी। याचिकाकर्ताओं, जो पश्चिम बंगाल सरकारी महाविद्यालय शिक्षक संघ से जुड़े हैं, ने 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने वाले दो चरणों के विधानसभा चुनाव के लिए विभिन्न मतदान केंद्रों पर उनकी नियुक्ति को चुनौती दी थी। एकलपीठ ने कहा था कि प्राधिकारियों ने ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया, जिससे यह साबित हो सके कि अपरिहार्य परिस्थितियों में ही उन्हें पीठासीन अधिकारी बनाया गया था। इसी आधार पर नियुक्ति रद्द की गई थी। संघ के अधिवक्ता शमीम अहमद के अनुसार, अदालत जाने वाले संगठन के 300 से अधिक सदस्य हैं।