18 Mar 2026
नई दिल्ली, 18 मार्च (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलियरी सायंस (आईएलबीएस) में ओपीडी के 25 फीसदी मरीजों और आईपीडी के केवल 10 फीसदी मरीजों को मुफ्त इलाज देने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को करने का आदेश दिया।
याचिका एनजीओ सोशल जूरिस्ट ने दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि आईएलबीएस लीवर के इलाज का काफी अच्छा सरकारी अस्पताल है। इस अस्पताल में हेपाटाइटिस, सिरोसिस, लीवर कैंसर इत्यादि जैसे गंभीर बीमारियों का इलाज किया जाता है। सार्वजनिक धन के जरिये चल रहा ये अस्पताल को एक पेड चिकिस्ता संस्थान के रुप में तब्दील हो गया है। याचिका में कहा गया है कि सरकारी खर्च से चलनेवाले इस अस्पताल का ये फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है।
याचिका में कहा गया है कि सरकार की ओर से रियायती दर पर आवंटित की गई भूमि पर चल रहे निजी अस्पताल भी ईडब्ल्यूएस मरीजों को 10 फीसदी आईपीडी श्रेणी में और 25 फीसदी ओपीडी श्रेणी में मुफ्त इलाज करते हैं। ऐसी ही सुविधा पूरे तरीके से सरकारी खर्च पर चलने वाले अस्पताल भी देते हैं।
याचिका में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि सरकारी खर्च पर चलने वाले अस्पताल सबको चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएंगे लेकिन आईएलबीएस अस्पताल को एक पेड अस्पताल में तब्दील कर दिया गया है। याचिका में आईएलबीएस की वर्तमान नीति को निरस्त कर समान्य नागरिकों के लिए सौ फीसदी बेड और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की गई है।