11 Feb 2026
नई दिल्ली, 11 फरवरी (हि.स.)। पश्चिम बंगाल स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), खड़गपुर को गांधीयन यंग टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन (जीवाईटीआई) पुरस्कार समारोह में जीवाईटीआई-2024 प्रशंसा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली में बुधवार काे आयोजित समाराेह में यह सम्मान संस्थान की सतत, सामाजिक रूप से प्रासंगिक और उन्नत तकनीकी नवाचारों में अग्रणी भूमिका को रेखांकित करता है। पुरस्कृत शोध का शीर्षक था कार्बन अवशोषण प्रक्रिया से प्राप्त सूक्ष्म शैवाल (माइक्रोएल्गी) बायोमास से निर्मित अनुकूलित बायो-कार्बन तथा औद्योगिक अपशिष्ट से पुनर्चक्रित सिलिकॉन कार्बाइड (एसआईसी) का उपयोग कर 3डी प्रिंटेड एसआईएसआईसी सिरेमिक प्रोटोटाइप का निर्माण। यह शोध उन्नत सिरेमिक निर्माण में सतत कच्चे माल के उपयोग का अभिनव मॉडल प्रस्तुत करता है। इस शोध को आईआईटी खड़गपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की एमएस शोधार्थी जॉयदीपा तारन ने किया, जिसमें पीएचडी शोधार्थी राजर्षि भड़ ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। परियोजना का मार्गदर्शन प्रो. ब्रजेश कुमार दुबे, डीन (कैम्पस एवं सामुदायिक विकास) एवं प्रो. चंद्रशेखर तिवारी, सहायक प्रोफेसर, धातुकर्म एवं सामग्री अभियांत्रिकी विभाग ने किया। साथ ही, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार (हेड – सीसीयू और एस) डॉ. रंजन प्रधान के सहयोग से यह शैक्षणिक–औद्योगिक सहभागिता और सुदृढ़ हुई। समारोह में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता ऑनलाइन माध्यम से सीएसआईआर के पूर्व महानिदेशक एवं रिलायंस न्यू एनर्जी काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. आरए माशेलकर ने की। सीएसआईआर–एनपीएल के निदेशक प्रो. वेणु गोपाल आचंता एवं प्रो. पीवीएम राव, डीन, यांत्रिक अभियांत्रिकी एवं डिजाइन विभाग ने भी छात्र-नेतृत्व वाले नवाचारों की राष्ट्रीय विकास में भूमिका पर प्रकाश डाला। एसआरआईएसटीआई (सस्टेनेबल टेक्नोलॉजीज एवं संस्थानों के लिए अनुसंधान एवं पहल सोसाइटी) एवं हनी बी नेटवर्क द्वारा स्थापित जीवाईटीआई पुरस्कार युवा छात्रों को इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, डिजाइन, कृषि, फार्मेसी सहित अन्य अनुप्रयुक्त क्षेत्रों में नवप्रवर्तन के लिए सम्मानित करता है। पुरस्कार मितव्ययी नवाचार, सामाजिक रूप से प्रासंगिक तकनीकी समाधान और तकनीकी सीमाओं को आगे बढ़ाने वाले कार्यों को मान्यता देता है। आईआईटी खड़गपुर ने इस उपलब्धि पर शोध दल और सभी सहयोगियों को बधाई दी है और समाजोपयोगी व सतत तकनीकी समाधानों के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।