22 Jan 2026
जोधपुर, 22 जनवरी (हि.स.)। ऑनलाइन साइट से खरीदी गई टाइटन की घड़ी नकली मिलने पर परिवादिया द्वारा प्रस्तुत परिवाद को स्वीकार करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग द्वितीय जोधपुर ने अमेजॉन इंडिया पर पच्चीस हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। अधिवक्ता महेंद्र पारीक ने चौपासनी हाउसिंग बोर्ड निवासी अनाहिता अली की ओर से जिला आयोग जोधपुर द्वितीय में परिवाद प्रस्तुत करते हुए बताया कि उसके द्वारा अपने पति को घड़ी उपहार स्वरूप देने के लिए अप्रैल 2022 में अमेजॉन इंडिया की साइट पर ऑर्डर बुक करवाया तथा उसके बदले में 2695 का भुगतान भी किया परिवादिया को घड़ी प्राप्त हो गई जो कुछ ही दिनों में खराब हो गई, जिसे टाइटन के अधिकृत स्थानीय विक्रेता को दिखाया जिन्होंने घड़ी को नकली टाइटन घड़ी बताया परिवादिया को यह सुनकर बहुत आघात लगा परिवादिया ने अमेजॉन को कीमत वापस देने के लिए संपर्क किया द्य समाधान नहीं होने पर परिवादिया ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया। आयोग के समक्ष अमेजॉन की ओर से जवाब में बताया कि आईटी अधिनियम के अंतर्गत विपक्षी को सेवा दोष के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। परिवादिया ने सीधे भुगतान विक्रेता को किया था ना कि अमेजॉन को इसलिए निर्माता एवं विक्रेता इसके लिए जिम्मेदार है। विक्रेता का अनुबंध परिवादिया एवं उत्पादक के निर्माता के मध्य है। हमारे मध्य कोई भी प्रिवीटी आफ कांटेक्ट नहीं है। परिवाद अस्वीकार किया जाए। आयोग के अध्यक्ष शर्मा एवं सदस्या अनुराधा व्यास ने दोनों पक्षों की बहस सुनकर अपने आदेश में कहा कि परिवादिया ने अमेजॉन के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रदर्शित घड़ी खरीदी है तथा खराबी ठीक करने स्थानीय विक्रेता को दिखाने पर घड़ी को नकली बताया गया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ई-कॉमर्स लेनदेन संदर्भ में उपभोक्ता प्लेटफार्म पर प्रदर्शित, ब्रांड, गुणवत्ता, प्रमाणिकता तथा विश्वसनीयता पर भरोसा करके क्रय करता है। नकली एवं दोषपूर्ण वस्तु की आपूर्ति अपने आप में अनुचित व्यापार है तथा सेवा में गंभीर कमी की श्रेणी में आता है। आयोग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के निर्णय का हवाला देते हुए निर्णय में कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफार्म इंटरफेस में सक्रिय भूमिका निभाता है तो वह उपभोक्ता के प्रति उचित सावधानी के दायित्व से मुक्त नहीं हो सकता। आयोग ने परिवादिया का परिवाद स्वीकार करते हुए अमेजॉन इंडिया को घड़ी की राशि 2695 मानसिक क्षतिपूर्ति के 25000 तथा परिवाद व्यय के रूप में 5000 अदा करने की आदेश दिए।