27 Dec 2025
नई दिल्ली, 27 दिसंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। कांग्रेस ने मोदी सरकार द्वारा मनरेगा योजना खत्म किए जाने के विरोध में आर-पार की लड़ाई का संकल्प लेते हुए फैसला लिया है कि आगामी 5 जनवरी से देशभर में 'मनरेगा बचाओ अभियान' शुरू किया जाएगा।
यह फैसला शनिवार को इंदिरा भवन स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में लिया गया। इसकी अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की। बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कर्नाटका, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों, अनेक पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
बैठक के बाद पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि कांग्रेस कार्य समिति ने मनरेगा की हर कीमत पर रक्षा करने की शपथ ली है और देशभर में बड़ा आंदोलन करने का फैसला लिया है।
उन्होंने कार्य समिति की बैठक में ली गई शपथ के पांच प्रमुख बिंदु दोहराते हुए बताया कि आगामी 05 जनवरी से देशभर में 'मनरेगा बचाओ अभियान' शुरू किया जाएगा। मनरेगा की हर हाल में रक्षा की जाएगी। मनरेगा कोई योजना नहीं, भारत के संविधान से मिला काम का अधिकार है। ग्रामीण मजदूरों के सम्मान, रोजगार, मजदूरी व समय पर भुगतान के अधिकार के लिए संघर्ष किया जाएगा, मांग-आधारित रोजगार और ग्राम सभा के अधिकार की रक्षा की जाएगी। मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने और मजदूर के अधिकार को खैरात में बदलने की हर साजिश का लोकतांत्रिक विरोध किया जाएगा। गांव-गांव तक आवाज बुलंद कर मजदूरों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
खरगे ने बताया कि मनरेगा योजना को मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने देश की जनता को एक अधिकार के रूप में प्रदान किया। इस योजना से दलितों, आदिवासियों, पिछड़े तबकों, महिलाओं व वंचित वर्गों को गांव में ही रोजगार मिला और पलायन रुका। कोरोना काल में मनरेगा ने करोड़ों प्रवासी मजदूरों को सहारा दिया। कई रिपोर्ट्स में मनरेगा को शानदार योजना बताया गया। उन्होंने याद दिलाया कि खुद मोदी सरकार ने संसद में स्वीकार किया था कि नीति आयोग के अध्ययन में पाया गया कि मनरेगा से टिकाऊ परिसंपत्तियां (ड्यूरेबल असेट्स) बनी हैं। लेकिन इन सबके बावजूद मोदी सरकार ने मनरेगा को खत्म कर गरीबों का हक छीनने का प्रयास किया।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नए कानून के तहत केंद्र सरकार 90 प्रतिशत की जगह सिर्फ 60 प्रतिशत और राज्य सरकार दस प्रतिशत की जगह 40 प्रतिशत खर्च वहन करेगी। इससे राज्य सरकारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और विकास कार्य बाधित होंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि मोदी सरकार को ऐसा करने की क्या जरूरत थी, जबकि वह दावा करती है कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार देश के अरबपतियों को लाखों-करोड़ रुपये दे देती है, लेकिन उसे गरीबों की चिंता नहीं है। साथ ही, उन्होंने मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने को राष्ट्रपिता का अपमान बताया।
इस मौके पर राहुल गांधी ने कहा कि मनरेगा कोई साधारण योजना नहीं, बल्कि अधिकार आधारित विचार था, जिस पर मोदी सरकार द्वारा आक्रमण किया गया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने करोड़ों गरीब लोगों को न्यूनतम मजदूरी की गारंटी दी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत किया। राहुल गांधी ने आगे कहा कि मनरेगा खत्म होने से कमजोर वर्गों, आदिवासियों, दलितों, ओबीसी, सामान्य गरीब वर्ग और अल्पसंख्यकों को बड़ा नुकसान होने वाला है। मोदी सरकार संघीय ढांचे पर हमला कर रही है। राज्यों से जो पैसा छीना जा रहा है, वह सत्ता और वित्त का केन्द्रीकरण है।
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश और मीडिया व पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा भी मौजूद थे।