02 Feb 2026
नई दिल्ली, 02 फ़रवरी (इंद्रप्रस्थ न्यूजएजेंसी)। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दों को उनके समक्ष उठाया। सूत्रों के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने तृणमूल प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में कानून का राज सर्वोपरि रहेगा। कोई भी व्यक्ति या संगठन यदि कानून को अपने हाथ में लेता है तो उसके विरुद्ध निर्वाचन आयोग को प्रदत्त शक्तियों और कानून के प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायक खुले तौर पर निर्वाचन आयोग, विशेष रूप से मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ अपमानजनक, अभद्र और धमकी भरी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही चुनावी कार्यों में लगे अधिकारियों को धमकाने की घटनाएं भी सामने आई हैं। राज्य में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और विधायकों द्वारा निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी कार्यालयों—जिनमें उप-मंडल अधिकारी और प्रखंड विकास अधिकारी कार्यालय शामिल हैं—में तोड़फोड़ और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुई हैं। सूत्रों के अनुसार निर्वाचन आयोग ने यह स्पष्ट किया कि एसआईआर प्रक्रिया में लगे किसी भी अधिकारी पर किसी भी प्रकार का दबाव, बाधा या हस्तक्षेप पूरी तरह अस्वीकार्य है और ऐसे मामलों में कड़ा रुख अपनाया जाएगा। इस बीच, बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को देय मानदेय को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई है। प्रत्येक बूथ लेवल अधिकारी को कुल 18,000 रुपये का मानदेय मिलना है, लेकिन अब तक केवल 7,000 रुपये का ही भुगतान किया गया है। आयोग ने शेष राशि का शीघ्र और बिना किसी और देरी के भुगतान सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। सूत्रों ने बताया कि एसआईआर के लिए तैनात किए गए कई निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी अपेक्षित स्तर के नहीं हैं और वे उप-जिलाधिकारी या तहसीलदार स्तर के अनुरूप नहीं माने जा रहे हैं, जिससे कार्य की गुणवत्ता और प्रभावशीलता प्रभावित हो रही है। उधर, तृणमूल कांग्रेस ने मुलाकात के बाद सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "हम इन बांग्ला-विरोधी ताकतों को एक इंच भी ज़मीन नहीं देंगे। ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी के नेतृत्व में एसआईआर की क्रूर प्रक्रिया के पीड़ितों सहित एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की। मुश्किल सवालों के जवाब देने या इस प्रक्रिया से हुई तबाही की ज़िम्मेदारी लेने के बजाय मुख्य चुनाव आयुक्त ने टालमटोल और घमंड का रास्ता चुना। चुनाव आयोग अब कोई स्वतंत्र संवैधानिक संस्था नहीं रही, यह बीजेपी का एक राजनीतिक हिस्सा बन गया है, जो बंगाल के वोटरों को खत्म करने और दिन दहाड़े लोकतंत्र में धांधली करने के उनके एजेंडे को लागू कर रहा है। लेकिन बंगाल झुकता नहीं है। हम डरेंगे नहीं। हमारे लोगों को वोट के अधिकार से वंचित करने की इस साज़िश का मुकाबला किया जाएगा और इसे हराया जाएगा।"