01 Apr 2026
नई दिल्ली, 01 अप्रैल (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने धार स्थित भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद के मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि वहां एएसआई की ओर से चलाये जा रहे सर्वे को लेकर मुस्लिम पक्ष की आपत्तियों पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय सुनवाई करेगा। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वो उच्च न्यायालय की कार्यवाही में कोई दखल नहीं देगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की कार्यवाही में वो दखल नहीं देगा। उच्च न्यायालय वैज्ञानिक सर्वे समेत सभी मामलों पर सुनवाई करेगा। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने साक्ष्यों को लेकर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष ने सर्वे के दौरान के फोटो और वीडियोग्राफी की प्रति मांगी थी ताकि आपत्ति दर्ज कराई जा सके। तब उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय ने इन आपत्तियों के लिए टाइमलाइन तय किया है। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि सर्वे की वीडियोग्राफी कोर्ट में प्ले की जा सकती है सभी पक्षों को इसकी सत्यता पर सवाल करने का हक है। बता दें कि, एक अप्रैल 2024 को उच्चतम न्यायालय ने भोजशाला परिसर के एएसआई सर्वे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। उच्चतम न्यायालय में मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी ने याचिका दाखिल की थी। याचिका में सर्वे से जुड़े मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर बेंच से आदेश पर रोक की मांग की थी। इस मामले में हिंदू संगठनों के मुताबिक धार स्थित कमाल मौलाना मस्जिद दरअसल मां सरस्वती मंदिर भोजशाला है, जिसे सन 1034 में राजा भोज ने संस्कृत की पढ़ाई के लिए बनवाया था। इसी परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने उच्च न्यायालय में अर्जी दायर की थी, जिस पर पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय की इंदौर बेंच ने एएसआई को वैज्ञानिक सर्वे करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से भोजशाला मामले में सर्वे पर मुस्लिम पक्ष की आपत्तियों पर विचार करने को कहा।