17 Apr 2026
नई दिल्ली, 17 अप्रैल (हि.स.)। सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य में अवैध खनन पर सख्ती रवैया अपनाते हुए राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश को हाई रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने और जीपीएस ट्रैकिंग करने का निर्देश दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने साफ किया कि अगर अवैध खनन का कोई मामला सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे तुरंत कार्रवाई करें और मौके पर टीम भेजें और कठोर कदम उठाएं। मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें सुनिश्चित करें कि अवैध खनन से प्रभावित इलाकों में ऊंचे खंभों पर हाई रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनकी लाइव फीड संबंधित जिले के एसपी या एसएसपी और संबंधित वन अधिकारी की सीधी निगरानी में रहे। कोर्ट ने आदेशों के उल्लंघन को अवमानना मानते हुए अफसरों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। सुप्रीम कोर्ट ने इन राज्यों से आदेश के अनुपालना संबंधी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि खनन गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों जैसे ट्रैक्टर, अर्थ मूवर्स और लोडर्स आदि में जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाए जाएं। इससे इन वाहनों की रियल टाइम मानिटरिंग हो सकेगी। कोर्ट ने साफ कहा कि जो भी वाहन चंबल इलाके से गुजरे उसमें ट्रैकर लगा होना चाहिए ताकि अवैध रेत परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके। इसके पहले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मध्यप्रदेश के मुरैना में एक फॉरेस्ट गार्ड पर रेत माफिया द्वारा ट्रैक्टर ट्राली चढ़ा देने के मामले पर कड़ा एतराज जताया था। कोर्ट ने मध्यप्रदेश के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा था कि जब राज्य की मशीनरी अपने अधिकारियों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने में नाकाम है तो उसका क्या अस्तित्व है। अधिकारियों की नाक के नीचे अवैध खनन हो रहे हैं। बता दें कि 2 अप्रैल को कोर्ट ने चंबल नदी में अवैध खनन से वन्यजीवों को हो रहे नुकसान पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि खनन माफिया चंबल के नये डकैत हैं। कोर्ट ने कहा था कि राजस्थान में खनन माफिया पुलिस, वन और प्रशासनिक अधिकारियों की हत्या कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार के उस नोटिफिकेशन पर रोक लगा दिया था जिसमें चंबल अभयारण्य की 732 हेक्टेयर भूमि को संरक्षित क्षेत्र से बाहर करने की कोशिश की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने चंबल नदी में जहां घड़ियाल छोड़े थे, वहां भी अवैध रेत खनन हो रहे हैं और राज्य सरकार इस पर नियंत्रण रखने में नाकाम है। कोर्ट ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर अवैध खनन नहीं रुका, तो वन, खनन, जल संसाधन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को इसका जिम्मेदार माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के अलावा केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।