18 Feb 2026
गांधीनगर, 18 फरवरी (हि.स.)। गुजरात विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन बुधवार को प्रदेश के वित्त मंत्री कनु देसाई ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4 लाख 8 हजार 53 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। लगातार पांचवीं बार बजट पेश कर उन्होंने नया रिकॉर्ड बनाया। बजट में प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता देते हुए शिक्षा विभाग के लिए कुल 63,184 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। बजट में विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने, स्कूलों के ढांचे को मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। शिक्षा विभाग के लिए प्रमुख घोषणाएं -मिशन स्कूल्स ऑफ एक्सीलेंस के अंतर्गत प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के आधारभूत ढांचे के सुधार के लिए 3055 करोड़ रुपये का प्रावधान। -नमो लक्ष्मी योजना के लिए 1250 करोड़ रुपये तथा शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए 827 करोड़ रुपये की व्यवस्था। -मुख्यमंत्री पौष्टिक अल्पाहार योजना के लिए 598 करोड़ रुपये का प्रावधान। -प्रधानमंत्री पोषण योजना के अंतर्गत 74 तालुकाओं में आधुनिक केंद्रीकृत रसोईघर बनाए जाएंगे। -नमो सरस्वती विज्ञान साधना योजना के तहत लगभग 2 लाख 50 हजार विद्यार्थियों को 250 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी। -ज्ञानशक्ति आवासीय उत्कृष्ट विद्यालयों के लिए 223 करोड़ रुपये का प्रावधान। -राज्य परिवहन निगम की बसों में यात्रा करने वाले लगभग 13 लाख विद्यार्थियों के लिए बस पास शुल्क रियायत योजना के लिए 223 करोड़ रुपये की व्यवस्था। -राज्य के 31,790 स्कूलों को स्वच्छता सहायता को दोगुना बढ़ाकर 135 करोड़ रुपये आवंटित। -उच्चतर प्राथमिक विद्यालयों में बालवाटिका से कक्षा 10 तक एक ही परिसर में शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए समेकित विद्यालयों के निर्माण के लिए 120 करोड़ रुपये का प्रावधान। -प्राथमिक विद्यालयों के लगभग 52 लाख विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने के लिए 119 करोड़ रुपये की व्यवस्था। -मुख्यमंत्री युवा स्वावलंबन योजना के अंतर्गत 18 लाख विद्यार्थियों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक देने के लिए 112 करोड़ रुपये का प्रावधान। -मुख्यमंत्री ज्ञान साधना मेरिट छात्रवृत्ति योजना के तहत एक लाख विद्यार्थियों को सहायता देने के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित। -कक्षा 6 से 12 में अध्ययनरत 9.72 लाख छात्राओं को सेनेटरी नेपकिन उपलब्ध कराने के लिए 47 करोड़ रुपये का प्रावधान। सरकार का कहना है कि इन घोषणाओं से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, छात्राओं की उपस्थिति में वृद्धि और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।