16 Feb 2026
नई दिल्ली, 16 फरवरी (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में दाखिल याचिका को चीफ जस्टिस की पीठ को रेफर कर दिया है। जस्टिस प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता वाली डिवीजन पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेश के बाद इस मामले पर एक स्पेशल पीठ गठित करने की जरुरत है। चीफ जस्टिस की पीठ के समक्ष ये मामला 19 फरवरी को लिस्ट होगा।
कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में तीन महीने के अंदर सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया है। इस मामले में कुलदीप सिंह सेंगर से जुड़ी याचिकाएं अलग-अलग बेंच में लंबित हैं। ऐसे में तीन महीने के अंदर सुनवाई पूरी नहीं की जा सकती है। उसके बाद कोर्ट ने इस मामले को चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ को रेफर कर एक स्पेशल बेंच गठित करने पर फैसला लेने को कहा।
दरअसल, दुष्कर्म पीड़िता ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कुलदीप सिंह की सजा को बढ़ाने की मांग की है। कुलदीप सेंगर ने भी ट्रायल कोर्ट की ओर से मिली 10 साल की सजा को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
इस मामले में 16 दिसंबर, 2019 को तीस हजारी कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हत्या के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को 10 साल की कैद की सजा सुनाई थी। तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर पर 10 लाख का जुर्माना भी लगाया था। तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर समेत सभी सातों आरोपितों को भी 10-10 साल की कैद और 10-10लाख के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
दुष्कर्म पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में 9 अप्रैल, 2018 को मौत हो गई थी। दुष्कर्म पीड़िता ने 4 जून 2017 को जब कुलदीप सेंगर पर रेप का आरोप लगाया था उसके बाद कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह और उसके साथियों ने पीड़िता के पिता को बुरी तरह पीटने के बाद पुलिस को सौंप दिया था। रेप पीड़िता के पिता को जेल में शिफ्ट करने के कुछ ही घंटों बाद जिला अस्पताल में पीड़िता के पिता की मौत हो गई थी।
पीड़िता से दुष्कर्म मामले में 20 दिसंबर, 2019 को तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने उम्रकैद के अलावा 25 लाख का जुर्माना लगाया था। जुर्माने की इस रकम में से 10 लाख पीड़िता को देने का आदेश दिया था। तीस हजारी कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ भी कुलदीप सिंह सेंगर ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।