14 Feb 2026
जोधपुर, 14 फरवरी (हि.स.)। राजस्थान उच्च न्यायालय ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (आरएसएमएसएसबी) द्वारा कई अभ्यर्थियों को बिना किसी आपराधिक दोषसिद्धि के दो वर्ष के लिए परीक्षाओं से डिबार (वंचित) करने के आदेश पर महत्वपूर्ण अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक किसी सक्षम आपराधिक न्यायालय द्वारा अभ्यर्थी के खिलाफ दोषसिद्धि का आदेश पारित नहीं किया जाता, तब तक केवल आरोपों या संदेह के आधार पर उन्हें भविष्य की सभी परीक्षाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। यह फैसला लाखों युवा अभ्यर्थियों के लिए बड़ी उम्मीद की किरण लेकर आया है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से सरकारी नौकरी पाने का सपना देख रहे हैं। यह मामला जस्टिस डॉ। नूपूर भाटी की एकलपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। याचिका में बांसवाड़ा और सलूंबर जिलों के निवासी भरत कुमार (जिन्हें याचिकाकर्ताओं में प्रमुख रूप से उल्लेखित किया गया है) सहित कुल 9 अभ्यर्थियों ने भाग लिया। इन अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की आपराधिक सजा या दोषसिद्धि नहीं हुई है, फिर भी राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने उन्हें आगामी दो वर्षों के लिए सभी परीक्षाओं से बाहर कर दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रिपुदमन सिंह ने मजबूत दलीलें पेश कीं। उन्होंने बताया कि बोर्ड की यह कार्रवाई राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम के उपाय) अधिनियम, 2022 की धारा 11 के स्पष्ट प्रावधानों के विपरीत है। उक्त अधिनियम की धारा 11 में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि परीक्षा में अनुचित साधनों के उपयोग या अन्य गड़बड़ी के मामले में डिबारमेंट (परीक्षाओं से वंचित करने) की कार्रवाई केवल तब की जा सकती है, जब अभ्यर्थी के खिलाफ सक्षम न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि का आदेश पारित हो चुका हो। मात्र पुलिस रिपोर्ट, प्रारंभिक जांच या आरोप-पत्र के आधार पर इतनी कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकती, क्योंकि इससे अभ्यर्थी का मौलिक अधिकार प्रभावित होता है और निर्दोष व्यक्ति भी पीडि़त हो सकता है। अधिवक्ता रिपुदमन सिंह ने याचिका में तर्क दिया कि बोर्ड का यह फैसला संवैधानिक सिद्धांतों, प्राकृतिक न्याय के नियमों और अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) तथा अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करता है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के प्रथम दृष्टया तर्कों को उचित मानते हुए राज्य सरकार, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (आरएसएमएसएसबी) तथा राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) को नोटिस जारी किया है। इन सभी पक्षकारों से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा गया है। साथ ही, कोर्ट ने अगली सुनवाई तक डिबार संबंधी टिप्पणी या आदेश के क्रियान्वयन पर पूर्ण रोक लगा दी है। इस अंतरिम आदेश के फलस्वरूप याचिकाकर्ता अब आगामी सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में बिना किसी बाधा के भाग ले सकेंगे। यह राहत न केवल इन 9 अभ्यर्थियों के लिए, बल्कि उन सैकड़ों अन्य उम्मीदवारों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिन्हें इसी प्रकार के डिबार आदेश का सामना करना पड़ रहा है।