29 Jan 2026
नई दिल्ली, 29 जनवरी (हि.स.)। आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर लंबी सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षकारों, कुत्ता प्रेमियों, कुत्ते के काटने के शिकार लोगों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं, केन्द्र और राज्य सरकारों की ओर से पेश वकीलों की दलीलों को विस्तार से सुना। 28 जनवरी को सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने आवारा कुत्तों के बधियाकरण, कुत्तों के लिए शेल्टर होम स्थापित करने, शैक्षणिक और दूसरी संस्थाओं के कैंपसों से उन्हें हटाने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में नाकाम रहने पर राज्य सरकारों से नाराजगी जताई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने असम की स्थिति पर आश्चर्य जताते हुए कहा था कि साल 2024 में राज्य में कुत्तों के काटने की 1.66 लाख घटनाएं घटी थीं लेकिन राज्य में केवल एक डॉग सेंटर था। गुजरात में कुत्तों के लिए शेल्टर होम्स की कोई सूचना नहीं मिली। उच्चतम न्यायालय ने झारखंड के हलफनामा पर गौर करते हुए कहा था कि पिछले दो महीने में 1.6 लाख कुत्तों के बधियाकरण की सूचना गलत लग रही है। दिल्ली के हलफनामे में कहा गया था कि 8 महीने में 68 हजार कुत्तों का बधियाकरण किया गया। ऐसे में एक साल में 80 हजार कुत्तों का ही बधियाकरण होगा। कोर्ट ने कहा कि इस गति से आवारा कुत्तों की आबादी पर लगाम नहीं लगाया जा सकेगा। कोर्ट ने 20 जनवरी को कहा था कि हम कुत्तों से सर्टिफिकेट लेकर चलने के लिए क्यों नहीं कह सकते हैं। सुनवाई के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने जैसे ही दलीलों को रखना शुरू किया था, कोर्ट ने मेनका गांधी की टिप्पणियों पर एतराज जताया। कोर्ट ने कहा कि कुछ दिनों पहले मेनका गांधी ने कोर्ट को समीक्षा करने को कहा था, ये कैसी टिप्पणी है।