09 Mar 2026
रायपुर, 09 मार्च (हि.स.)। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को बजट सत्र के छठवें दिन बस्तर संभाग में धान खरीद को लेकर प्रश्नकाल के दौरान जबरदस्त हंगामा हुआ। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई और शुरुआत प्रश्नकाल से हुई। छत्तीसगढ़ विधानसभा में वर्ष 2025-26 की धान खरीद को लेकर बस्तर संभाग के जिलों की स्थिति पर सवाल उठाया गया। खाद्य मंत्री से पूछा गया कि बस्तर संभाग के जिलों में धान खरीद के लिए कितने किसान पंजीकृत हैं, धान खरीद का निर्धारित लक्ष्य क्या है और वास्तविक उपलब्धि कितनी रही। साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई कि कितने किसानों ने पहली किस्त में धान जमा किया, कितने किसानों ने दूसरी किस्त में धान बेचा और कितने किसान ऐसे रहे जो धान नहीं बेच पाए। विधायक लखेश्वर बघेल ने ये जानकारी जिलावार उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि धान खरीदी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। इसके साथ ही पूरक प्रश्न में यह भी पूछा गया कि धान खरीद के बाद धान के उठाव की वर्तमान स्थिति क्या है। विशेष रूप से यह जानकारी मांगी गई कि बस्तर संभाग के जिलों में कस्टम मिलरों और परिवहनकर्ताओं ने अब तक कितना धान उठाया गया है और कुल उठाव की जिला-वार स्थिति क्या है। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने दी जानकारी छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीद के बाद धान उठाव की स्थिति सामने आई है। राज्य के खाद्य मंत्री दयालदास बघेल की दी गई जानकारी के अनुसार 19 फरवरी 2026 तक बस्तर संभाग के जिलों में कस्टम मिलर्स और परिवहनकर्ताओं ने धान का उठाव किया है। जारी आंकड़ों के अनुसार बस्तर जिले में कस्टम मिलर्स ने 14,474.49 मीट्रिक टन और परिवहनकर्ताओं ने 32,372.37 मीट्रिक टन धान उठाया किया। इससे कुल उठाव 46,846.86 मीट्रिक टन रहा। बीजापुर जिले में कुल 21,888.59 मीट्रिक टन धान का उठाव हुआ, जिसमें कस्टम मिलर्स ने 14,165.95 मीट्रिक टन और परिवहनकर्ताओं ने 7,722.64 मीट्रिक टन धान उठाया। दंतेवाड़ा जिले में कुल 9,757 मीट्रिक टन धान का उठाव दर्ज किया गया। वहीं कांकेर जिले में सबसे अधिक धान उठाव हुआ है। यहां कस्टम मिलरों द्वारा 79,228.06 मीट्रिक टन और परिवहनकर्ताओं द्वारा 68,300.26 मीट्रिक टन धान उठाया गया, जिससे कुल उठाव 1,47,528.30 मीट्रिक टन रहा। कोंडागांव जिले में कुल 58,911.78 मीट्रिक टन धान उठाव हुआ, जिसमें कस्टम मिलरों का 12,859.74 मीट्रिक टन और परिवहनकर्ताओं का 46,052.04 मीट्रिक टन योगदान रहा। नारायणपुर जिले में कुल 17,383.06 मीट्रिक टन धान उठाया गया, जबकि सुकमा जिले में कुल 16,608.14 मीट्रिक टन धान का उठाव दर्ज किया गया। खाद्य मंत्री ने बताया कि बस्तर संभाग के जिलों में धान उठाव की प्रक्रिया लगातार जारी है और आवश्यकतानुसार परिवहन एवं मिलिंग की व्यवस्था की जा रही है। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि 44,612 किसान धान खरीद केंद्रों में धान बेचने ही नहीं आए।उन्होंने दावा किया कि जो किसान धान लेकर खरीद केंद्रों तक पहुंचे, उनका धान खरीदा गया है। हालांकि मंत्री के इस जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और सरकार पर धान खरीद व्यवस्था में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार को घेरते हुए पूछा कि कितने किसानों से रकबा समर्पण कराया गया है और उनमें से कितने किसानों से जबरन रकबा समर्पण कराया गया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए पूछा कि बस्तर में ऐसे कितने किसान हैं जिनका दूसरा टोकन जारी हुआ, लेकिन वे धान नहीं बेच सके।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिन किसानों ने केसीसी के तहत कर्ज लिया है, उनका धान खरीदा जाएगा या फिर सरकार उनका कर्ज माफ करेगी।उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीद के नाम पर किसानों के साथ अन्याय हो रहा है और सरकार इस पर स्पष्ट जानकारी देने से बच रही है।धान खरीद के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सवालों के जवाब में मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि कांग्रेस सरकार में भी ऋणी किसानों का धान नहीं खरीदा गया था। कांग्रेस विधायक कवासी लखमा ने कहा कि बस्तर संभाग के 32 हजार 200 से अधिक आदिवासी किसानों से धान खरीद क्यों नहीं हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन किसानों का धान नहीं खरीदा गया और जिन पर कर्ज भी है, उनके साथ सरकार क्या करेगी। लखमा ने यह भी सवाल उठाया कि बस्तर के किसानों को धान का करीब 206 करोड़ रुपये मिलना था, ऐसे में अब उन किसानों का क्या होगा और उनका कर्ज कौन चुकाएगा। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि जिन किसानों ने खरीद केंद्रों तक धान पहुंचाया, उनका धान खरीदा गया है। उन्होंने कहा कि जो किसान केंद्र तक धान लेकर नहीं पहुंचे, उनका धान नहीं खरीदा जा सका।मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार सभी किसानों का धान खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है और यह कहना गलत है कि किसानों का धान नहीं खरीदा गया। मंत्री दयालदास बघेल के जवाब से विपक्षी विधायक संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद विपक्ष के सदस्यों ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। बाद में हंगामे के बीच विपक्षी दलों के विधायकों ने विरोध दर्ज कराते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।