21 Feb 2026
जयपुर, 21 फ़रवरी (हि.स.)। रेरा ने एक फैसले में कहा कि लोन से पूर्व आवंटित फ्लेट्स से डिफाल्टर बिल्डर के लोन की वसूली नहीं की जा सकती। इसके साथ बिल्डर कम्पनी के खिलाफ दिवालिया कानून में कार्रवाई के चलने के दौरान भी रेरा बिल्डर कंपनी के निदेशकों व भू-स्वामी के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। रेरा की अध्यक्ष वीनू गुप्ता ने यह आदेश आवंटियों की संस्था एवलोन रॉयल पार्क होम बायर्स एसोसिएशन के प्रार्थना पत्र पर दिया। रेरा ने माना कि जमीन मालिक, बिल्डर के साथ प्रोजेक्ट की शुरूआत से ही सहभागी रहे हैं, उसने बिल्डर की ओर से प्राप्त राशि में से अंश राशि भी ली है। एनसीएलटी में दिवालिया कानून के तहत कार्रवाई शुरू होने पर बिल्डर कंपनी ने रेरा में आवंटियों की कार्रवाई को खत्म करने का प्रार्थना पत्र लगाया था। वहीं आवंटियों की ओर से अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल ने कहा कि कहा कि बिल्डर ने उनसे करोडों रुपये लेने के बाद भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया और उसने इस राशि को खुर्द-बुर्द कर दिया। वहीं वित्तीय कंपनी ईसीएल से मिलीभगत कर पूरी इमारत को लोन के लिए गिरवी रख दी। आवंटियों को 12 साल बाद भी न तो फ्लैट का कब्जा मिला है और न ही उनके पैसे वापस किए। इसलिए बिल्डर का प्रार्थना पत्र खारिज करें। दरअसल बिल्डर कम्पनी मैसर्स जीआरजे डिस्ट्रीब्यूटर्स व डवलपर्स ने साल 2012 में भिवाडी में एवलोन रॉयल पार्क आवासीय प्रोजेक्ट का काम शुरू किया। इसमें 1200 से ज्यादा फ्लैट्स बनने थे और निर्माण 2017 तक होना था। बिल्डर ने 700 से ज्यादा फ्लैट्स का बेचान 2012 से 2016 के दौरान आवंटियों को किया। वहीं आवंटियों से करीब 300 करोड रुपये लेकर भी पूरा प्रोजेक्ट विकसित नहीं किया। इसके बाद साल 2018 में बिल्डर ने पूरे प्रोजेक्ट को ही ईसीएल फाइनेंस को 50 करोड रुपये में गिरवी रख दिया। जिस पर ईसीएल की ओर से इनवेन्ट एसिट नाम की कम्पनी ने एनसीएलटी में लोन की वसूली की याचिका दायर की।