06 Feb 2026
नई दिल्ली, 06 फ़रवरी (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने तेलंगाना विधानसभा के स्पीकर को भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेने के लिए अंतिम मौका दिया है। जस्टिस संजय करोल की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अगर स्पीकर तीन हफ्ते में फैसला नहीं लेते हैं तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरु की जाएगी। याचिका बीआरएस पार्टी ने दायर की है। सुनवाई के दौरान विधानसभा स्पीकर की ओर से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि स्पीकर ने एक मामले पर फैसला कर लिया है और दो पर वो फैसला लेने वाले हैं। राज्य में नगरपालिका के चुनाव थे जिसकी वजह से फैसला लेने में देरी हुई। इसका विरोध करते हुए बीआरएस के वकील ने कहा कि विधानसभा स्पीकर इसके पहले भी समय ले चुके हैं। तब जस्टिस करोल ने कहा कि इसके पहले की सुनवाई में विधानसभा स्पीकर ने फैसला लेने के लिए तीन हफ्ते का समय मांगा था, लेकिन न्यायालय ने दो हफ्ते का समय दिया था। न्यायालय ने कहा कि अगर तीन हफ्ते में कोई फैसला नहीं करते हो हम अवमानना की कार्रवाई शुरु करेंगे। उच्चतम न्यायालय ने 17 नवंबर 2025 को अयोग्यता पर फैसला नहीं करने पर तेलंगाना के विधानसभा स्पीकर के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का नोटिस जारी किया था। तत्कालीन चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि स्पीकर ने तीन महीने का समय बीत जाने के बाद भी कोई फैसला नहीं किया। उच्चतम न्यायालय ने 31 जुलाई 2025 को स्पीकर को निर्देश दिया था कि वे कांग्रेस में शामिल हुए 10 बीआरएस विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं पर तीन महीने के भीतर फैसला करें। विधायकों की अयोग्यता पर फैसला करने में देरी लोकतंत्र के लिए खतरा है। संसद को, विधायकों की अयोग्यता के मामलों में निर्णय लेने की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए, क्योंकि कई बार विधानसभा स्पीकर इन मामलों में जानबूझकर देरी करते हैं जिससे दलबदलू विधायकों के खिलाफ कार्रवाई बेअसर हो जाती है। बीआरएस पार्टी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि उनकी पार्टी के टिकट पर 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ने वाले 10 विधायकों के संबंध में फैसला लेने में विधानसभा स्पीकर काफी देरी कर रहे हैं। ये विधायक बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। उच्चतम न्यायालय ने 10 फरवरी 2025 को कहा था कि लोकतंत्र में पार्टियों के अधिकार को खत्म नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने स्पीकर से कहा था कि वे एक निर्धारित समय सीमा में अयोग्यता के लिए दायर अर्जियों पर फैसला करें। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि हम लोकतंत्र के दो दूसरे स्तंभों का सम्मान करते हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि संसद के कानून का मकसद ही कामयाब नहीं हो। कोर्ट ने स्पीकर को निर्देश दिया था कि वो ये बताएं कि वे कब तक इन अर्जियों पर फैसला करेंगे। कोर्ट ने स्पीकर की ओर से पेश वकील से पूछा कि आप इस पर भी निर्देश लेकर आएं कि क्या उचित समय का मतलब विधानसभा का सत्र समाप्ति तक तो नहीं है। इस मामले में तेलंगाना उच्च न्यायालय ने स्पीकर को निर्देश दिया था कि वे विधायकों की अयोग्यता के मामले पर जल्द फैसला लें।