11 Feb 2026
नई दिल्ली, 11 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने नीतीश कटारा हत्याकांड में सजा काट रहे विकास यादव की तीन हफ्ते के लिए फरलो पर रिहा करने की याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस रविंद्र डूडेजा की बेंच ने याचिका खारिज करने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि विकास यादव को फरलो पर रिहा नहीं करने के जेल महानिदेशक के आदेश में कोई दखल की जरुरत नहीं है। कोर्ट ने 5 जनवरी, 2025 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान नीतीश कटारा के परिवार की ओर से वकील संचार आनंद ने विकास यादव की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि अगर विकास यादव को फरलो पर रिहा किया जाता है तो गवाहों की सुरक्षा प्रभावित होगी। संचार आनंद की इस दलील का विरोध करते हुए विकास यादव के वकील विकास पाहवा ने कहा था कि गवाह को 20-20 सुरक्षाकर्मी 24 घंटे सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहते हैं। विकास यादव ने तिहाड़ जेल के महानिरीक्षक से फरलो पर तीन हफ्ते के लिए रिहा करने की मांग की थी जिसे नामंजूर कर दिया गया था। जेल प्रशासन ने विकास यादव के खिलाफ अपराध की गंभीरता, पीड़ित के परिवार की सुरक्षा का हवाला देकर किए जा रहे विरोध को देखते हुए अर्जी खारिज कर दी थी। विकास यादव ने जेल महानिरीक्षक के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। याचिका में विकास यादव ने कहा था कि 25 साल की सजा में उसने 23 साल से ज्यादा हिरासत में गुजार दिए हैं। विकास यादव ने कहा था कि वो अपनी मां की देखभाल और शादी के लिए चार महीने के अंतरिम जमानत पर था लेकिन उसने जमानत की किसी भी शर्तों का उल्लंघन नहीं किया। 3 अक्टूबर 2016 को उच्चतम न्यायालय ने विकास यादव की सजा घटाकर 25 साल कर दी थी। विकास यादव उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता डीपी यादव का बेटा है। 17 फरवरी, 2002 को नीतीश कटारा की हत्या कर दी गई थी। नीतीश कटारा का विकास यादव की बहन भारती यादव के साथ प्रेम संबंध था, जाे यादव परिवार को मंजूर नहीं था।