07 Apr 2026
नई दिल्ली, 07 अप्रैल (हि.स.)। बैंक धोखाधड़ी मामले में ट्रायल कोर्ट से मिली तीन साल की सजा को मध्यप्रदेश के दतिया से पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश सरकार और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को करने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के आदेश पर कोई भी रोक लगाने से इनकार कर दिया। राजेंद्र भारती ने दोषी करार देने के आदेश पर रोक लगाने और निर्वाचन आयोग को दतिया विधानसभा के चुनाव कराने के लिए नोटिफिकेशन नहीं जारी करने का दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की है। याचिका में कहा गया है कि अगर निर्वाचन आयोग चुनाव की तिथियों की घोषणा कर देता है, तो याचिकाकर्ता के राजनीतिक करियर को काफी नुकसान होगा। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने एक अप्रैल को राजेंद्र भारती को दोषी करार दिया था और दो अप्रैल को तीन साल की कैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के तुरंत बाद राजेंद्र भारती को मध्यप्रदेश विधानसभा से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। कोर्ट ने भारती के अलावा रघुवीर शरण प्रजापति को भी दोषी करार दिया था। इस मामले में राजेंद्र भारती की मां सावित्री श्याम भी आरोपित थीं, लेकिन उनकी पहले ही मौत हो गई थी। मामला 24 अगस्त, 1998 का है, जब सावित्री श्याम ने जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक में तीन साल के लिए 13.5 फीसदी ब्याज के दर पर दस लाख रुपये का फिक्स्ड डिपॉजिट कराया। ये डिपॉजिट सावित्री श्याम ने श्री श्याम सुंदर श्याम जन सहयोग एवं सामाजिक विकास संस्थान के नामक ट्रस्ट के नाम से कराया। इस ट्रस्ट का गठन सावित्री श्याम के पति श्याम सुंदर श्याम ने किया था। आरोप है कि सावित्री श्याम ने इस फिक्स्ड डिपॉजिट की रकम मैच्योर होने के बजाय 1999 से हर साल एक लाख 35 हजार रुपये ब्याज लेने लगीं। फिक्स्ड डिपॉजिट की शर्तों का उल्लंघन करते हुए ब्याज लेने का सिलसिला 13 वर्ष तक 2011 में खत्म हुआ। आरोप है कि राजेंद्र भारती ने बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के निदेशक पद पर रहते हुए ब्याज की रकम अपनी मां को देने के लिए कर्मचारियों पर दबाव बनाया। इसके लिए बैंक की रसीदों, खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट के प्रमाण पत्र से छेड़छाड़ की गई। दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर तीन वर्ष के फिक्स्ड डिपॉजिट की शर्तों को बढ़ाकर 10 साल और 15 साल किया गया। दस्तावेजों से छेड़छाड़ इसलिए की गई, ताकि ज्यादा समय तक ऊंची ब्याज दर से भुगतान हो। शिकायतकर्ता बैंक ने 29 जुलाई 2015 में मध्यप्रदेश में केस दर्ज कराया था। पहले से मामला राजेंद्र भारती और उनकी मां के खिलाफ ही दर्ज कराया गया था। बाद में प्रजापति को भी आरोपित बनाया गया। राजेंद्र भारती ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की और इसकी सुनवाई दिल्ली में ट्रांसफर करने की मांग की। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई मध्यप्रदेश से दिल्ली कर दी।