19 Feb 2026
भुवनेश्वर, 19 फ़रवरी (हि.स.)। ओडिशा सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में राज्य की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की व्यापक तस्वीर सामने आई है। कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन, बढ़ते निवेश और सामाजिक सूचकों में सुधार के कारण राज्य की आर्थिक वृद्धि राष्ट्रीय औसत से अधिक दर्ज की गई है। सरकार ने विकास के साथ-साथ वित्तीय अनुशासन और कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार भी जारी रखा है। सर्वेक्षण के अनुसार, चालू मूल्यों पर राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्ष 2025-26 में लगभग ₹9.9 लाख करोड़ आंका गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.5 प्रतिशत अधिक है। वास्तविक वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो राष्ट्रीय औसत 7.4 प्रतिशत से अधिक है। प्रति व्यक्ति आय 9.2 प्रतिशत बढ़कर ₹1,86,761 हो गई, जिससे राष्ट्रीय आय स्तर के साथ अंतर कम होने का संकेत मिलता है। श्रम बल भागीदारी दर 2022 के 58.1 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 64.5 प्रतिशत हो गई, जबकि महिला भागीदारी 37.6 प्रतिशत से बढ़कर 48.7 प्रतिशत तक पहुंची, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। यह महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में वृद्धि दर्शाता है। कृषि एवं संबद्ध गतिविधियाँ राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनी हुई हैं और इनका योगदान 19.6 प्रतिशत है। कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 5.3 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय कृषि वृद्धि से अधिक है। वर्ष 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन 150.5 लाख मीट्रिक टन और धान उत्पादन 118.6 लाख टन रहा। कपास, मक्का, सब्जी और मसालों की खेती में विविधीकरण भी बढ़ा है। सरकार ने लगभग 20 लाख किसानों से 92.6 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा और ₹21,300 करोड़ एमएसपी भुगतान किया। सिंचाई क्षेत्र 74.2 लाख हेक्टेयर तक बढ़ा। दुग्ध, पोल्ट्री और मत्स्य क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई। दूध उत्पादन 27.1 लाख टन और अंडा उत्पादन 406 करोड़ तक पहुंचा। मत्स्य उत्पादन 11.92 लाख टन के साथ ओडिशा देश का चौथा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक राज्य बन गया। औद्योगिक क्षेत्र का योगदान 41.3 प्रतिशत रहा और विनिर्माण क्षेत्र 8.3 प्रतिशत की दर से बढ़ा। वर्ष 2025 में ₹5.66 लाख करोड़ की 244 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनसे 3.35 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है। लागू परियोजनाओं से ₹1.75 लाख करोड़ निवेश और 1.4 लाख नौकरियां मिलीं। सेवा क्षेत्र का योगदान 39.1 प्रतिशत रहा और इसके 9.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। राज्य ने मजबूत वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है। ऋण-जीएसडीपी अनुपात 13.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पूंजीगत व्यय जीएसडीपी का 6.6 प्रतिशत है। स्वास्थ्य और शिक्षा पर व्यय बढ़ाया गया तथा कौशल विकास कार्यक्रमों में 93 प्रतिशत प्लेसमेंट दर्ज हुआ। महिला सशक्तिकरण योजनाओं से 16.42 लाख “लखपति दीदी” तैयार हुईं और सामाजिक समावेशन में सुधार हुआ। खेल अवसंरचना, परिवहन और डिजिटल निवेश भी बढ़ाए गए हैं। सर्वेक्षण के अनुसार ओडिशा अब संसाधन आधारित अर्थव्यवस्था से बहुआयामी और समावेशी विकास मॉडल की ओर तेजी से अग्रसर है तथा पूर्वी भारत की उभरती आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है।