23 Feb 2026
--आपराधिक केस कार्यवाही रद्द प्रयागराज, 23 फरवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि दो पढ़े लिखे बालिगों के बीच लम्बे समय तक कायम शारीरिक सम्बंध, शादी का वायदा पूरा न करने का अपराध नहीं है। ऐसे में आपराधिक केस जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने याची के खिलाफ आपराधिक केस कार्यवाही, चार्जशीट, सम्मन आदेश रद्द कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने बस्ती कोतवाली के श्याम बहादुर यादव की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता आदित्य गुप्ता व वरिष्ठ अधिवक्ता ने बहस की। कोर्ट ने कहा स्वीकृत तथ्य है कि पीड़िता व आरोपी दोनों 2016 से एक दूसरे को जानते हैं। 2019 से शादी के वायदे पर शारीरिक सम्बंध बनाए। परिवार शादी को राजी था। 2019 से 2025 तक सम्बंध कायम रहा। 2020 में दो बार गर्भपात भी कराया। पीड़िता जिला अस्पताल में डाटा एक्जक्यूटिव है और याची अंबेडकर नगर मेडिकल कॉलेज में जूनियर क्लर्क हो गया है।कोर्ट ने कहा सम्बंध सहमति से था या नहीं, इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि लम्बे समय तक शारीरिक सम्बंध कायम रखा है, तो अवधारणा सहमति की होगी। बाद में शादी के इंकार से बलात्कार का अपराध नहीं बनता। कोर्ट ने कहा पीड़िता ने एफआईआर में यह तथ्य नहीं दिया कि वह तलाकशुदा महिला है। जो तथ्य है उसके आधार पर सजा की उम्मीद कम है। इसलिए केस जारी रखना मिसकैरेज आफ जस्टिस है। और कोर्ट ने केस कार्यवाही रद्द कर दी।