06 Feb 2026
नई दिल्ली, 06 फ़रवरी (हि.स.)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि फैज ए इलाही मस्जिद का अतिक्रमण हटाने के दौरान पत्थर चलाने के मामले में रोड पर खड़े लोगों को आरोपित नहीं बनाया जा सकता है। जस्टिस प्रतीक जालान ने आरोपित साजिद इकबाल की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणी की। उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि दिल्ली पुलिस बताये कि याचिकाकर्ता की क्या भूमिका थी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से संबंधित वीडियो की दाखिल करने को कहा। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा कि वो इस मामले में गहरी साजिश का पता लगा रही है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि साजिद इकबाल ने बैरिकेड हटाए और लोगों को उकसाने का काम किया। कोर्ट में जब दिल्ली पुलिस ने घटना का वीडियो प्ले किया। तब कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि आप वीडियो को उचित टाइम स्टांप लगाकर दिखाइए। कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता भीड़ का हिस्सा था, तब भी हिंसा में उसकी भूमिका पर विचार करना होगा। अगर वीडियो में दिखेगा कि आरोपित भीड़ को उकसा रहा था, तब तो ठीक है और अगर वो केवल सड़क पर खड़ा है, तो आप उसे उठा नहीं सकते। सुनवाई के दौरान आरोपित साजिद इकबाल के वकील ने कहा कि वो पत्थर फेंकने वाली भीड़ का हिस्सा नहीं था। याचिकाकर्ता अपने रिश्तेदार के यहां से अपने घर लौट रहा था जब उसे भीड़ में धकेल दिया गया। तीस हजारी कोर्ट ने साजिद इकबाल की अग्रिम जमानत याचिका 21 जनवरी को खारिज कर दी थी। तीस हजारी कोर्ट ने कहा था कि अभी जांच प्रारंभिक चरण में है इसलिए अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। रामलीला मैदान इलाके के पास 7 और 8 जनवरी की रात फैज ए इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई की गई। अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के बाद हिंसा भड़क गई और लोगों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया, जिसमें पांच पुलिसकर्मी घायल हो गये।