16 Mar 2026
इंदौर, 16 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर के विवादित स्थल का उच्च न्यायालय के न्यायाधीश दौरा कर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद आगामी दो अप्रैल से मामले की नियमित सुनवाई होगी।
यह बात सोमवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने भोजशाला से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कही। न्यायाधीश विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की युगलपीठ में करीब डेढ़ से दो घंटे चली सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने सर्वे रिपोर्ट पर आपत्ति ली। इस दौरान अदालत ने पक्षकार बनने के लिए आए सभी आवेदन स्वीकार करते हुए कहा कि किसी को भी यह न लगे कि उसे सुनवाई का अवसर नहीं मिला है। मामले की नियमित सुनवाई दो अप्रैल से शुरू होगी। अगली सुनवाई से पहले न्यायालय स्वयं भोजशाला स्थल का निरीक्षण करेगा।
उच्च न्यायालय ने कहा कि पहले याचिकाकर्ताओं को सुना जाएगा, इसके बाद पक्षकारों की सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान यह बात भी उठी कि उच्चतम न्यायालय के आदेश पर इस केस की जल्द से जल्द सुनवाई होना है, लेकिन इंटरविनर बनने से सुनवाई में देरी हो सकती है। इसलिए इन्हें सबसे आखिरी में यानी पक्षकारों के बाद सुना जाएगा। सुनवाई के दौरान एएसआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन और राज्य सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता जनरल प्रशांत सिंह अदालत में मौजूद रहे।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल हुए। वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन भी अदालत में मौजूद रहीं। वहीं हिंदू फ्रंट की तरफ से याचिकाकर्ता आशीष गोयल और अधिवक्ता विनय जोशी कोर्ट में उपस्थित थे। इस मामले में कई लोगों की तरफ से याचिकाएं लगाई गई हैं। इनमें काजी जकुल्लाह, अंतर सिंह और अन्य लोग, मौलाना कमालउद्दीन वेलफेयर सोसायटी धार के अब्दुल समद खान, कुलदीप तिवारी और हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की अध्यक्ष रंजना अग्निहोत्री शामिल हैं।
भोजशाला मामले में गत 23 फरवरी को हुई सुनवाई में उच्च न्यायालय ने सभी याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट पर दो हफ्ते के भीतर अपनी आपत्तियां और सुझाव देने के निर्देश दिए थे। दाखिल जवाबों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
गौरतलब है कि ऐतिहासिक भोजशाला का विवाद एक प्राचीन परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर है। हिंदूपक्ष इसे वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका पर उच्च न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को आधुनिक तकनीकों से वैज्ञानिक सर्वे कराने का निर्देश दिया था।
एएसआई की पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने 22 मार्च से 27 जून 2024 तक 98 दिनों तक परिसर में और उससे 50 मीटर की परिधि का सर्वे किया और चार जुलाई 2024 को 10 खंडों में विभाजित 2,189 पृष्ठों की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में प्रस्तुत की थी। इसी बीच मस्जिद पक्ष ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। उच्चतम न्यायालय सुप्रीम कोर्ट ने 28 जनवरी, 2025 को आदेश दिया कि इस मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में ही की जाए। साथ ही निर्देश दिए कि दोनों पक्षों को सर्वे रिपोर्ट की प्रति दी जाए और अंतिम निर्णय तक भोजशाला का मूल स्वरूप यथावत बनाए रखा जाए।