20 Mar 2026
नई दिल्ली, 20 मार्च (हि.स.)। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े अध्याय को दोबारा लिखने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार काे इसकी सूचना उच्चतम न्यायालय को दी। केंद्र सरकार की इस सूचना के बाद उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में स्वत: संज्ञान के जरिये शुरु की गई कार्यवाही का निस्तारण करने का आदेश दिया। केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल तुषार मेहता ने कहा कि तीन सदस्यीय कमेटी में उच्चतम न्यायालय के पूर्व जजों जस्टिस इंदू मल्होत्रा, जस्टिस अनिरुद्ध बोस और पूर्व अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल शामिल हैं। इस मामले में 11 मार्च को उच्चतम न्यायालय ने एनसीईआरटी की कक्षा 8 में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का एक अध्याय लिखने के जिम्मेदार लोगों को भी सरकारी कामों से हटाने का आदेश दिया था। उच्चतम न्यायालय ने प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार के खिलाफ ये आदेश जारी किया था। उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि हम ये साफ कर देना चाहते हैं कि या तो इन लोगों को न्यायपालिका के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है या जानबूझकर इसे गलत तरीके से पेश किया गया है। इन लोगों का उद्देश्य आठवीं कक्षा के छात्रों के बीच न्यायपालिका की नकारात्मक छवि पेश करना था। आठवीं कक्षा सीखने की कच्ची उम्र होती है। उच्चतम न्यायालय ने 26 फरवरी को इस किताब पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि इस किताब का ऑनलाइन या फिजिकल किसी भी तरह से शेयर करने को कोर्ट के आदेश की अवमानना माना जाएगा। कोर्ट ने कहा था कि इस तरह की किताब एक सोची समझी साजिश के तहत न्यायपालिका को बदनाम करने की नीयत से प्रकाशित की गई है।