06 Feb 2026
नई दिल्ली, 06 फ़रवरी (हि.स.)। राज्य सभा में शून्य काल के दौरान ऑनलाइन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए एक नीति लाने की मांग उठी। शुक्रवार को कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने सरकार से ऑनलाइन प्लेटफार्म के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की। इस मुद्दे को उठाते हुए राजीव शुक्ला ने कहा कि सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाने और व्यक्तियों की छवि खराब करने के लिए सरकार की ओर से कोई जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। हाल ही में हुई एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि तीन किशोरियों ने एक कोरियाई ऑनलाइन गेम के प्रभाव में आकर आत्महत्या कर ली थी। इस तरह की न जाने कितनी घटनाएं सामने आ रही हैं लेकिन कोई नीति नहीं होने के कारण किसी की भी जिम्मेदारी तय नहीं हो पा रही। उन्होंने मांग की कि सरकार को झूठ और गलत जानकारी फैलाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर जिम्मेदारी तय करने के लिए एक नीति बनानी चाहिए। राजीव शुक्ला ने सवाल उठाया "डिजिटल भ्रम, अवास्तविक अपेक्षाओं और ऑनलाइन दबाव के कारण टूट चुके किशोर की मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करने की जिम्मेदारी किसकी है?" इसके साथ उत्तर प्रदेश की सांसद सुमित्रा बाल्मिक ने सरकार और निजी क्षेत्र दोनों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए 60 वर्ष से अधिक आयु के माता-पिता की देखभाल के लिए अनिवार्य 45 दिनों के अवकाश का प्रावधान किए जाने की मांग की। सांसद ने कहा कि वर्ष 2026 में भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी होने के बावजूद देश में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 14.9 करोड़ से अधिक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2036 तक यह आंकड़ा 23 करोड़ को पार कर जाएगा। उन्होंने कहा, “जल्द ही देश का हर तीसरा नागरिक बुज़ुर्ग होगा।” सांसद ने कहा कि तेज़ी से हो रहे शहरीकरण और रोज़गार के अवसरों के कारण करोड़ों युवा अपने घरों से दूर बसने को मजबूर हैं, जिससे उनके बुज़ुर्ग माता-पिता गांवों या कस्बों में अकेले रह जाते हैं। उन्होंने बुज़ुर्गों की देखभाल से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि जब घर में किसी बुज़ुर्ग को चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है, तब बेटे या बेटी की शारीरिक उपस्थिति बेहद ज़रूरी होती है। लेकिन नौकरीपेशा लोग अक्सर कार्यालय से छुट्टी नहीं ले पाते, जिससे उन्हें गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा, “जिस तरह एक मां अपने बच्चे को 20 वर्षों तक पालती है, उसी तरह बेटे या बेटी को भी बीमार माता-पिता की सेवा और देखभाल के लिए अवकाश मिलना चाहिए।” इसके साथ ही राज्य सभा में डब्ल्यूएचओ के अनुरूप शिक्षक प्रशिक्षण की आवश्यकता, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए बुनियादी ढांचा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजित करने के लिए मणिपुर में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की मांग भी उठाई गई।