25 Mar 2026
नई दिल्ली, 25 मार्च (हि.स.)। चीफ जस्टिस सूर्यकांत बुधवार काे एक मामले की सुनवाई के दौरान भड़क गए। एक मामले में पहले के दिए आदेश के बाद एक व्यक्ति ने उनके भाई को फोन किया और पूछा कि चीफ जस्टिस ऐसा आदेश कैसे जारी कर सकते हैं। इस मामले पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने हरियाणा सरकार के वकील को कड़ी फटकार लगाई और अवमानना की कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी। चीफ जस्टिस ने कहा कि उस व्यक्ति की हिम्मत कैसे हुई मेरे भाई को फोन करने की। क्या अब वह मुझे डिक्टेट करेगा। भले ही वह भारत के बाहर कहीं भी छिपा हो, मुझे पता है कि ऐसे लोगों से कैसे निपटना है। मैं पिछले 23 सालों से ऐसे लोगों से निपटता आ रहा हूं। दरअसल हरियाणा के भाई बहन निखिल पुनिया और एकता पुनिया ने पीजी मेडिकल में दाखिला लेने के लिए बौद्ध अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र के तहत लाभ की मांग की थी। इस मामले पर सुनवाई के दौरान 28 जनवरी को चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने गहरी आपत्ति जताते हुए इसे नये तरीके का फर्जीवाड़ा करार दिया था। याचिकाकर्ता ने याचिका दायर कर अल्पसंख्यक अभ्यर्थी के तौर पर दाखिले की मांग की थी। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा था कि आप पुनिया हैं , आप कौन से अल्पसंख्यक हैं। आप हमें ये बताएं कि आप कौन से पुनिया हैं। तब याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि जाट पुनिया। तब कोर्ट ने पूछा था कि आप अल्पसंख्यक कैसे हो गए। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि बौद्ध धर्म अपना लिया है और आरक्षण पर मेरा अधिकार है। तब कोर्ट ने कहा था कि अच्छा , ये नये तरीके का फर्जीवाड़ा है। सुनवाई करते हुए कोर्ट ने हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया था कि वो अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र देने संबंधी दिशानिर्देशों से कोर्ट को अवगत कराएं। कोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा था कि वो ये बताए कि क्या सामान्य वर्ग का अभ्यर्थी बौद्ध धर्म अपनाकर अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र का हकदार हो सकता है।