30 Dec 2025
उपराष्ट्रपति ने तिरुवनंतपुरम के मार इवानियोस कॉलेज के प्लेटिनम जुबली समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया
नई दिल्ली, 30 दिसंबर (इंद्रप्रस्थ न्यूज)। उपराष्ट्रपति, सी. पी. राधाकृष्णन, ने आज तिरुवनंतपुरम के मार इवानियोस कॉलेज के प्लेटिनम जुबली समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया, जो शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में संस्थान के 75 वर्षों के योगदान का प्रतीक है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि मार इवानियोस कॉलेज जैसे संस्थान शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति का उदाहरण हैं, जो न केवल ज्ञान प्रदान करती है बल्कि समाज को अज्ञानता और असमानता से भी मुक्त करती है।
उन्होंने कहा कि जब शैक्षिक और आध्यात्मिक संस्थान संवैधानिक मूल्यों के साथ संरेखित होते हैं, तो वे राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत इतिहास के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, और दुनिया नेतृत्व और नवाचार के लिए भारत की ओर देख रही है। उन्होंने युवाओं से न केवल अपने संवैधानिक अधिकारों बल्कि अपने मौलिक कर्तव्यों का भी पालन करने का आग्रह किया, जिसमें विविधता का सम्मान, वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता शामिल है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त किए गए विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि युवा भविष्य का इंतजार नहीं कर रहे हैं, बल्कि सक्रिय रूप से उसे आकार दे रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक विकसित भारत न केवल सत्ता के गलियारों में बल्कि कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, खेतों, कारखानों, स्टार्ट-अप और गांवों में युवा भारतीयों की ऊर्जा और आकांक्षाओं से बनाया जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को प्राप्त करने में शिक्षा की भूमिका पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 रटने की प्रणाली से हटकर बहु-विषयक शिक्षा, आलोचनात्मक सोच, नवाचार और रचनात्मकता की ओर एक परिवर्तनकारी बदलाव का प्रतीक है।
भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षिक परिसरों को नवाचार और उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित होना चाहिए। उन्होंने छात्रों से न केवल रोजगार पाने बल्कि रोजगार पैदा करने और सामाजिक चुनौतियों के स्वदेशी समाधान विकसित करने की आकांक्षा रखने का आग्रह किया। युवाओं से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसी उभरती टेक्नोलॉजी को अपनाने का आह्वान करते हुए, उपराष्ट्रपति ने नैतिकता, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक भलाई की चिंता से निर्देशित होकर, टेक्नोलॉजी का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
भारत के शिक्षा और साक्षरता क्षेत्र में केरल की बेहतरीन भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्य की उपलब्धियां यहां के लोगों और संस्थानों के सामूहिक प्रयासों को दिखाती हैं, जो शिक्षा के ज़रिए युवाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, स्थानीय स्वशासन मंत्री, केरल एम. बी. राजेश, संसद सदस्य डॉ. शशि थरूर, तिरुवनंतपुरम नगर निगम के मेयर वी. वी. राजेश, तिरुवनंतपुरम के मेजर आर्कबिशप-कैथोलिकोस और मार इवानियोस कॉलेज के संरक्षक, हिज बीटिट्यूड बेसेलियोस कार्डिनल क्लीमिस और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।