24 Mar 2026
नई दिल्ली, 24 मार्च (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में तीनों सेनाओं की महिला अधिकारियों को बड़ी राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों को स्थायी कमीशन का अधिकार दिया है। उच्चतम न्यायालय ने चयन बोर्ड के अधिकारियों को 20 साल की सेवा पूरी मानते हुए पेंशन का अधिकार भी दिया है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस मामले के लंबित रहने के दौरान सेवा से निकाली गई महिला सैन्य अधिकारियों को 20 साल की क्वालीफाइंग सर्विस पूरी करने वाली माना जाएगा और उन्हें एक जनवरी, 2025 से एरियर के साथ पूरी पेंशन मिलेगी। उच्चतम न्यायालय ने उन लोगों को स्थायी कमीशन देने का निर्देश दिया जो अभी भी सेवा में हैं और 60 फीसदी कट-ऑफ को पूरा करते हैं, जो क्लीयरेंस के अधीन है।
उच्चतम न्यायालय ने नौसेना के महिला सैन्य अफसरों के मामले पर कहा कि एकमुश्त उपाय के तहत योग्य महिला अफसरों को मेडिकल फिटनेस के आधार पर स्थायी कमीशन मिलेगा। 2009 के बाद शामिल हुई महिलाएं भी इसका हकदार होंगी। कोर्ट ने वायु सेना को लेकर कहा कि जिन अफसरों को अपने कैरियर में सही मौका नहीं मिला, उनके खिलाफ सेवा की अवधि का इस्तेमाल स्थायी कमीशन रोकने के लिए नहीं किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि भविष्य में चयन प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी रखा जाए। इस साल सिर्फ ढाई सौ महिलाओं को स्थायी कमीशन देने की सीमा सही नहीं है। विशेष परिस्थितियों में इस सीमा के पार जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि स्थायी कमीशन देने का फैसला योग्यता के आधार पर हो, इस तरह की सीमा के आधार पर नहीं हो।
कोर्ट ने कहा कि पूरा इवैल्यूएशन सिस्टम भेदभावपूर्ण था। एसीआर इस सोच के साथ लिखी गई थीं कि महिलाओं का करियर लंबे समय तक नहीं चलेगा, जिससे कैजुअल या गलत ग्रेडिंग हुई। कोर्ट ने पाया कि महिलाओं को क्राइटेरिया अपॉइंटमेंट और करियर एनहांसमेंट कोर्स से इसलिए मना कर दिया गया, क्योंकि वे पहले स्थायी कमीशन के लिए अयोग्य थीं, जिससे बाद में जब वे योग्य हुईं तो उनकी योग्यता सीधे तौर पर कम हो गई।