22 Jan 2026
सुभाष चन्द्र बोस जयंती के अवसर पर विशेष आलेख (एक महान ऑस्ट्रियन नारी थी एमिली शेंकल) डॉ. मोक्षराज हमें आजादी यूँ ही न मिली ! नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारत के लिए केवल निज जीवन का ही दान नहीं किया बल्कि निज प्रेम व परिवार को भी देशभक्ति की बलिवेदी पर समर्पित कर दिया था । प्रेम की अमर कथा- नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पत्नी एमिली शेंकल एक ऑस्ट्रियाई महिला थीं, 1934 में ऑस्ट्रिया में इलाज के दौरान स्टेनोग्राफर एमिली शेंकल की भेंट सुभाष चंद्र बोस से हुई। दोनों के बीच गहरा प्रेम था। भेंट के तीन वर्ष बाद उनकी यही टाइपिस्ट सहधर्मिणी बनीं, उन्होंने 1937 में आस्ट्रिया के एक रिसॉर्ट में वैदिक रीति-रिवाज़ से विवाह किया, किंतु नाजी जर्मनी के सख्त कानूनों के कारण उनका यह रिश्ता गोपनीय रहा। नेताजी की एक पुत्री 29 नवंबर, 1942 को एमिली ने वियना में बेटी अनीता बोस को जन्म दिया। नेताजी की पुत्री अनीता बोस वर्तमान में अनीता फाफ के नाम से जर्मनी में एक अर्थशास्त्री के रूप में प्रतिष्ठित हैं । जिनसे मैं 2023 में एक ऑनलाइन बैठक में मिला था। अपनों से फिर न मिल पाये जब अनीता बोस 3 माह की थीं, नेताजी अपनी इस दुधमुही पुत्री व तपस्या की प्रतिमूर्ति महान देवी एमिली बोस के अनंत प्रेम को देशप्रेम के शीतल लेप से सम्मोहित कर फरवरी 1943 में दक्षिण पूर्व एशिया के लिए रवाना हो गए । उसके बाद भारत के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस अपनी पत्नी और बेटी से कभी नहीं मिल पाए। बंधुओ, यह प्रेम कहानी, कर्तव्य और बलिदान का अतुलनीय उदाहरण है। पतिव्रता एमिली का अद्भुत् संघर्ष नेताजी के स्वातंत्र्य समर में कूदने के बाद एमिली शेंकल ने अपने स्वाभिमानी जीवन की रक्षा के साथ-साथ अपनी बेटी का पालन-पोषण व अपनी मॉं की भी देखभाल की । उन्होंने जीवन निर्वाह के लिए ट्रंक एक्सचेंज और डाकघर में क्लर्क के रूप में भी काम किया । मित्रो, वह महान देवी आजीवन नेताजी के प्रति समर्पित रहीं, यही कारण था कि उन्होंने भरी जवानी में भी अन्य भोगवादी यूरोपियन स्त्रियों की भाँति दूसरा या तीसरा विवाह नहीं किया । उन्होंने भारत की आजादी के लिए नेताजी के संघर्ष को हमेशा सम्मान दिया। किंतु, नेताजी से जुड़े रहस्यों ने यहॉं भी पीछा नहीं छोड़ा। वियना में एक साधारण जीवन जीते हुए 1996 में एमिली शेंकल बोस की रहस्यमयी मृत्यु हो गई । राष्ट्रप्रेम में नेह समर्पित, राष्ट्रप्रेम में देह समर्पित। राष्ट्रप्रेम में लोक समर्पित, राष्ट्रप्रेम परलोक समर्पित॥ एमिली बोस को सम्मान मिले ! मित्रो, जब हम इस महान वीरांगना के बारे में सोचते हैं तो एक अपमानजनक अध्याय भी सम्मुख आता है, वह यह कि जिस भारत में करोड़ों रोहिंग्या, बांग्लादेशी, इटली व पाकिस्तान से घुसपैठिये व एजेंट आकर अराजकता फैलाते व धर्मांतरण करते रहे हैं, आखिर उस देश में भारत के लाडले, सच्चे देशभक्त की धर्मपरायण पत्नी को भारत का वीजा क्यों नहीं दिया गया था ? आखिर वह भी देखना चाहती थी कि जिस देश के लिए उनके पति ने व स्वयं उसने सर्वस्व न्योछावर कर दिया, वह भारत है कैसा ? भारत की बहू, उस महान नारी को मेरे जैसे करोड़ों भारतीय उनके मरणोपरांत वीजा नहीं बल्कि पासपोर्ट व भारतरत्न देते हुए देखना चाहते हैं । (लेखक- जॉर्ज टाउन यूनिवर्सिटी, अमेरिका में प्रोफेसर रहे हैं )