10 Mar 2026
-बांदा में लगेगा 20 हजार लीटर क्षमता का नया डेयरी प्लांट-झांसी प्लांट की क्षमता 30 हजार लीटर प्रतिदिन तक बढ़ेगी लखनऊ, 10 मार्च (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने बुंदेलखंड क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रस्ताव काे मंजूरी दे दी। इसके तहत बुंदेलखंड पैकेज के अंतर्गत जनपद बांदा में 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के नए डेयरी प्लांट की स्थापना और झांसी में पहले से स्थापित 10 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के डेयरी प्लांट का विस्तार कर उसे 30 हजार लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक हुई। बैठक में झांसी में लगे 10 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के डेयरी प्लांट का विस्तार कर उसे 30 हजार लीटर प्रतिदिन तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही बांदा में 20 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के नए डेयरी प्लांट की स्थापना की मंजूरी भी दीगई है। कैबिनेट में इन परियोजनाओं के सिविल और मैकेनिकल कार्य टर्न-की आधार पर कराने के लिए इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी लि. को कार्यदायी संस्था नामित किया है। कैबिनेट ने इस कंपनी को नियमानुसार सेंटेज चार्ज देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है, जिसका व्यय राज्य सरकार अपने स्रोतों से वहन करेगी। उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी कैबिनेट बैठक में इसके अलावा उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली, 1975 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उच्च न्यायालय की संस्तुति के आधार पर उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा (अठारहवां संशोधन) नियमावली, 2026 लागू की जाएगी। इसके तहत भर्ती, कोटा और चयन प्रक्रिया से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव किया गया है। संशोधन के अनुसार भर्ती के स्रोत से जुड़े नियम-5, कोटा से संबंधित नियम-6, चयन प्रक्रिया से जुड़े नियम-18, पदोन्नति से संबंधित नियम-20, नियुक्ति से जुड़े नियम-22 और परिशिष्ट-1 में बदलाव किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से पदोन्नति का कोटा 65 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है। यह पदोन्नति श्रेष्ठता और वरिष्ठता के आधार पर तथा उपयुक्तता परीक्षा पास करने वाले अधिकारियों को दी जाएगी। वहीं सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के जरिए पदोन्नति का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। इसमें वही सिविल जज शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने उस पद पर कम से कम तीन साल की सेवा और उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में कम से कम सात साल की सेवा पूरी की हो। इसके अलावा अधिवक्ताओं (बार) से सीधी भर्ती का कोटा पहले की तरह 25 प्रतिशत ही रहेगा।